- किसान आदिवासी संगठन और समाजवादी जन परिषद ने दिया सांसद को ज्ञापन
इटारसी। नर्मदापुरम जिले में ऐसे 50 वनग्राम हैं, जिन्हें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सरकार की परियोजनाओं के अंतर्गत विस्थापित किया है। उनके विस्थापन के 15-20 वर्ष होने के बावजूद न तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभ से वंचित रखा है। वन अधिकार कानून वर्ष 2006 में बना है पर कानून के बनने के बावजूद भी दलित एवं आदिवासियों को अभी तक सरकार ने किसान नहीं माना है, तथा जिनका पीडिय़ों से वन भूमि पर कब्जा है, इसका उन्हें पट्टा अभी तक नहीं मिल पाया है।
यह बात प्रभारी मंत्री राकेश सिंह के साथ केसला पहुंचे सांसद दर्शन सिंह को आदिवासियों ने बतायी और मांग पूरी करने निवेदन किया। समाजवादी जन परिषद के राष्ट्रीय सचिव फागराम एवं किसान आदिवासी संगठन के कपिल खंडेलवार, मंगलसिंह ठाकरे, संपत यादव, सुनील कलमे व शेरसिंह ने उन्हें क्षेत्रीय समस्याओं पर ज्ञापन सौंपा जिसमें बताया कि नर्मदापुरम जिले के 50 ऐसे वनग्राम हैं जिन्हें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सरकार की परियोजनाओं के द्वारा विस्थापित किया है, विस्थापन के 15 से 20 वर्ष हो चुके हैं, पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ से अभी तक वंचित रखा है।
समाजवादी जन परिषद के फागराम एवं किसान आदिवासी संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने सांसद दर्शन सिंह को याद दिलाया कि इसी संबंध में 19 जुलाई 2024 को भी उनको एक ज्ञापन केसला में सौंपा था। नर्मदापुरम जिले में गैर आदिवासियों (दलितों) को वन भूमि का अधिकार पत्र देने में सरकार की सूची शून्य रही है। वन अधिकार कानून अधिनियम 2006 के तहत इस बार भी इसी विषय पर सांसद से बात की गई। उन्होंने कहा कि आपने 19 जुलाई को ज्ञापन दिया था, हमें ध्यान है और तभी से इस पर कार्यवाही शुरू है। इस दौरान फागराम सहित कपिल खंडेलवार, मंगलसिंह ठाकरे, संपत यादव, सुनील कलमे एवं शेर सिंह भी उपस्थित रहे।








