दुष्कर्म का मामला : एक ही परिवार के 5 सदस्यों को कैद ए बा-मशक्कत

दुष्कर्म का मामला : एक ही परिवार के 5 सदस्यों को कैद ए बा-मशक्कत

नाबालिग से हुये दुष्कर्म के मामला
इटारसी। न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुरेश कुमार चौबे होशंगाबाद के न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में 5 आरोपियों को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने सभी को दो-दो हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
पैरवीकर्ता जिला लोक अभियोजन अधिकारी एवं विशेष लोक अभियोजक केपी अहिरवार ने बताया कि 11 फरवरी 2018 को फरियादी ने पुलिस थाना पथरौटा में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज करवाई कि वह मजदूरी करता है, उसके दो बच्चे हैं। लडकी अभियोक्त्री है जो कि 14 वर्ष की नाबालिग बालिका है व कक्षा 9 में पढ़ती है। फरियादी की लड़की रोज उसकी बहन या उसके घर के सामने रहने वाले परिचित चाचा के घर टीव्ही सीरियल देखने जाती है। 10 फरवरी 2018 को शाम करीब 7 बजे वह काम पर से वापस आया और अपने परिवार के साथ रात्रि करीब 8:30 बजे खाना खाया, फिर उसकी लड़की रोज की तरह टीव्ही देखने का कहकर चली गई। जब रात्रि करीब 10:30 बजे तक वह घर नहीं आई तो फरियादी ने अपनी पुत्री की आसपड़ोस में तलाश की,, जहां वह टीवी देखने जाती थी, किन्तु वह वहां नहीं मिली। फरियादी को शंका थी कि उसकी नाबालिग लड़की को कोई अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसला के अपने साथ ले गया है। उक्त गुम इंसान रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना पथरोटा द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया। विवेचना के दौरान उपनिरीक्षक भोजराज बरबड़े ने अभियोक्त्री को 02 मार्च 2018 को अभियुक्त आनंद राठौर, आरती राठौर, श्रीमती सुशीला राठौर के कब्जे से दस्याब किया। अभियोक्त्री को ले जाये जाने में आरोपी आनंद ने अपने मुंह बोले मामा अशोक मेहरा की मोटरसाईकिल का इस्तेमाल किया था, जिसे पुलिस ने अपनी विवेचना में सह-आरोपी के रूप में शामिल किया। संपूर्ण विवेचना उपरांत न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय द्वारा समस्त आरोपियों आनंद पिता दिलीप सिंह राठौर, उम्र 19 वर्ष अभियुक्त, अशोक वल्द शिवराम, उम्र 40 वर्ष आरोपी का मामा, आरती वल्द दिलीप सिंह, उम्र 22 वर्ष आरोपी की बहन, सुशीलाबाई पति दिलीप सिंह, उम्र 41 वर्ष आरोपी की मां एवं रतन सिंह वल्द दिलीप सिंह, उम्र 30 वर्ष आरोपी का भाई सभी निवासी ग्राम सोठिया, थाना पथरौटा, तहसील-इटारसी, जिला होशंगाबाद में आरोपी आनंद को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 एवं 376(2) (एन) में क्रमश: 5 वर्ष एवं 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 3000 रूपये अर्थदंड तथा अन्य आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 109/120 बी में 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 2-2 हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किया।

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