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“बस यही हम जानते हैं “

“बस यही हम जानते हैं “

एक नेता अपने गुरू से कहता,
आपने 40 (चालीस) वर्ष शिक्षा में बिताया।
जीवन में क्या कमाया,
आज तक फटे हाल रहते हो
जिंदगी जीने को मोहताज रहते हो।
आपने सदा आदर्श रचाया है,
अपने को मिटा समाज को बनाया है।।
स्वयं मिटने वालों का यही हाल होता है,
दूसरों को बना अपने को खोता है।।
आज हमको ही देखो, हमें पांच साल मिलते हैं
जीवन की बगिया में, नये फूल खिलते हैं।।
इन फूलों की माला से, स्वागत सदा होता है
हम अपने पर ध्यान रखते, भले कोई रोता है।।
आंसुओं को हम घड़ियाली मानते हैं।
क्या क्या हमे करना, बस यही हम जानते हैं।।
सुरेश चंद्र जोशी, गांधीनगर, इटारसी

SC Joshi

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