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मेरे शिक्षक के लिए मन की बात

मेरे शिक्षक के लिए मन की बात

शिक्षक दिवस है, संयोग से गणेश चतुर्थी भी है। भगवान श्री गणेश का नाम एकदंत उन्हें महर्षि व्यास ने दिया। क्योंकि व्यास उवाच ग्रन्थ महाभारत भगवन गणेश ने बिना रुके लिखी थी, महाभारत लिखते समय कलम टूट जाने के कारण उन्होंने अपना एक दन्त तोड़कर तत्काल उससे लिखने का काम जारी रखा था। मैं अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ गुरु गोखले बहनजी को मानते हुए आज स्मरण करना चाहता हूँ और उनके बारे में उल्लेख करना चाहता हूँ। उन्होंने हमें प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाया था। हमारा सौभाग्य ही था कि तीसरी से पांचवी कक्षा तक वो ही क्लास टीचर रहीं। हम विद्यार्थियों में से कई अब भी इटारसी में ही निवास और व्यापार करने वालों में डॉ दीपक जैन, डॉ जैसवानी, मुरलीधर अग्रवाल, पवन अग्रवाल, रमेश पटेल, विजय पटेल, अनिल हैरी आदि शामिल हैं।

मुझ पर सबसे ज्यादा प्रभाव गोखले बहनजी द्वारा प्रतिदिन सीरियल के रूप सुनाई जाने वाली कथाओ में महाभारत के दो पात्रों के सम्पूर्ण चित्रण ने डाला। उन्होंने विदुर और कर्ण के चरित्रों को जिस प्रकार से हमें सुनाया था उसका प्रभाव आज भी चिरस्थायी है। उन दो पात्रों की कथाओं को गोखले बहनजी के माध्यम जो कुछ मैंने सीखा उसे लिखने का आज बहुत मन कर रहा था, इस लिए लिखने बैठ गया। न लिखता तो मन से उँगलियों तक उतरने वाला शब्द रक्त मुझे चैन से जीने नहीं देता।

विदुर के जीवन चित्रण से मैंने एक बात जानी कि शिक्षा से कोई भी सम्मान पाने का अधिकारी हो जाता है। इसके शायद पहले उदहारण हैं जो दासी पुत्र थे और शिक्षा के सहारे ज्ञान प्राप्त कर अपनी सूझबूझ के धनी बने। थोड़ा और अर्थपूर्ण बातें कहना उनकी पहचान था, लाक्षागृह से पांडवों को बचने का उपाय बताने का सन्दर्भ बहुत से लोग जानते होंगे और यही कारण है कि विदुर सैंकड़ों वर्षों से सम्मान के साथ याद किये जाते हैं। वहीँ कर्ण ने दान देते समय निस्संकोच रहने को चरितार्थ किया। याचक दान लेने के बाद क्या करेगा उसका विचार किये बिना दान देने का चरित्र ही उन्हें महादानी की संज्ञा देने पर मजबूर करता है।

गोखले बहनजी से सीख में मिले इन चरित्रों का अनुसरण जीवन भर करता रहूँ, ईश्वर से याचना करता हूँ और गोखले बहनजी की स्वस्थ सुदीर्घ आयु की ईश्वर से कामना करता हूँ।

भारत भूषण आर गाँधी

BBR Gandhi

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