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संपादक का नजरिया : देश को विश्वास दिलाना होगा कि शहादत बेकार नहीं जाएगी

संपादक का नजरिया : देश को विश्वास दिलाना होगा कि शहादत बेकार नहीं जाएगी

– रोहित नागे (अतिथि संपादक)
उरी में आतंकवादी हमले के बाद एक बार फिर देश में विचारधाराओं के मामले में बंटवारा हुआ है। हमले के फौरन बाद तात्कालिक रोष स्वभाविक प्रक्रिया है। सारा देश गुस्से में है और नजरें सरकार पर है। उस पार्टी की सरकार पर जो सत्ता में आने से पहले तक पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाने का दावा करती रही है। देश की जनता द्वारा भाजपा को केन्द्र की सत्ता सौंपने का एक कारण यह भी माना जाना चाहिए। लेकिन, युद्धपिपासुओं को शायद प्रधानमंत्री की इस कार्यप्रणाली से निराशा हो। उग्र विचारधारा हमेशा यही चाहती है कि क्रिया की प्रतिक्रिया तत्काल देखने को मिले। वे भूल जाते हैं कि युद्ध दुश्मन को कमजोर समझकर कभी नहीं लड़े जाते हैं। फिर पाकिस्तान सामयिक दृष्टि से कमजोर देश नहीं है। वह परमाणु संपन्न है। युद्ध में जाने से पहले काफी आगे-पीछे सोचना पड़ेगा। युद्ध विश्वयुद्ध में न बदल जाए, यह सोचना होगा अन्यथा संपूर्ण मानवता के लिए खतरा पैदा करने की स्थिति भारत के सिर फूटेगी। विश्व में भारत को एक जिम्मेदार देश के तौर पर देखा जाता है। युद्ध के निर्णय यूं हड़बड़ी में नहीं लिए जाते हैं।

प्रधानमंत्री देश को आश्वस्त कर रहे हैं कि उरी में हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह टिप्पणी उचित तो है, लेकिन देश में पैदा हो रहे भ्रम के माहौल को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री को एक स्पष्ट सोच देश के सामने रखनी चाहिए। सरकार किस नीति पर आगे बढ़ेगी। हालात यही है कि देश जानना चाहता है कि आखिर उरी के गुनाहगारों के साथ सरकार क्या करेगी? उस पाकिस्तान को संपूर्ण विश्व में अलग-थलग करने की नीति अच्छी है, जिसके परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में ज्यादातर देश पाकिस्तान की बातों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमारा एक पड़ोसी पाकिस्तान के साथ है। यदि सरकार को आगे बढऩा है तो इन देशों को आर्थिक तौर पर तोडऩे की दिशा में भी कदम उठाया जाना चाहिए। पाकिस्तान से व्यापार कर रहे हमारे व्यापारियों को भरोसे में लें। देशहित सर्वोपरि है, पाकिस्तान और चीन से व्यापारिक संबंध खत्म करने चाहिए। चीन के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और यहां का पैसा उसकी आर्थिक समृद्धि में काफी योगदान देता है। हमें यहां से चीन का कारोबार खत्म करना चाहिए। सोशल मीडिया पर खूब बातें हो रही हैं। लोगों से कहा जा रहा है कि वे चीनी सामान का बहिष्कार करें, लेकिन सामान यदि भारत में आएगा, सस्ता होगा तो लोगों को रोक पाना कठिन है। आप ऐसा करें कि चीनी सामान देश में आए ही नहीं। यह सरकार को करना चाहिए।

प्रेस को भी अपनी कलम चलाने में सावधानी बरतना होगा। उरी हमले के बाद प्रेस की कलम बेरोकटोक चली। इलेक्ट्रानिक मीडिया ने तो हद कर दी। युद्ध जैसा माहौल बनाने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी। टेलीविजन पर रक्षा विशेषज्ञों की पूछ परख बढ़ी और टीआरपी की होड़ शुरु हो गई। ऐसा लगा माना पत्रकारों की कलम ने बंदूक की शक्ल ले ली। खेल, कला जगत भी इससे अछूता नहीं रहा। राज ठाकरे की पार्टी ने पाकिस्तानी कलाकारों को भारत छोडऩे की चेतावनी दे डाली तो पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरभ गांगुली ने पाकिस्तान से क्रिकेट संबंध खत्म करने की बात कह डाली। ये सब भारतीयता और देशभक्ति जताने के लिए जरूरी कदम समझे जाने लगे। होना भी चाहिए क्योंकि हमें अपने महान देश पर नाज़ हैं और किसी की कुदृष्टि कदापि बर्दाश्त नहीं होगी। परंतु एक जिम्मेदार देश होने के नाते हमें अपने व्यवहार में भी जिम्मेदारी लानी होगी। केवल बयानबाजी करके आप किसी देश को नहीं हरा सकते। एक शहर के चौराहे पर नवाज शरीफ का पुतला जलाने, जूते मारने और नारेबाजी करने से नवाज शरीफ के सेहत पर कोई फर्क नहीं पडऩा है। ऐसे लोगों में से ज्यादातर ऐसे होंगे जो केवल दिखावे और दूसरे दिन अखबार में खुद को देखने की इच्छा रखने वाले होते हैं। ऐसे लोगों को देशभक्ति दिखाना है तो उसके और भी तरीके हैं। बहरहाल, सरकार को कुछ ऐसे कदम जल्द उठाने होंगे जिससे इस देश को यह भरोसा हो जाए कि हमने अपने शहीद सैनिकों की शहादत को ज़ाया नहीं होने दिया। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी

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