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हिसाब अभी बराबर नहीं, वहशियों के अगले कदम का करें इंतज़ार…!

हिसाब अभी बराबर नहीं, वहशियों के अगले कदम का करें इंतज़ार…!

– रोहित नागे (अतिथि संपादक)
नफरत की बुनियाद पर बनी इमारत में रहने वालों का मन भी नफरत से ही भरा होगा। वे क्या जाने मुहब्बत से जीना और रहना क्या होता है, जो बचपन से ही मन में नफरत पालकर जी रहे हैं।

– रोहित नागे (अतिथि संपादक)
नफरत की बुनियाद पर बनी इमारत में रहने वालों का मन भी नफरत से ही भरा होगा। वे क्या जाने मुहब्बत से जीना और रहना क्या होता है, जो बचपन से ही मन में नफरत पालकर जी रहे हैं। 
यही तस्वीर पाकिस्तान की है। दो कौम के बीच नफरत फैलाकर पाकिस्तान को जन्म देने वालों ने अपनी अवाम के मन में जन्म के समय से ही नफरत के बीज बोये हैं और कहते हैं न, कि बचपन में बच्चे को जैसा मोड़ दो, वह गीली लकड़ी की तरह होता है। पाकिस्तान की आबादी में ज्यादातर लोग उसी वक्त के हैं जो अपने मन में भारत के खिलाफ नफरत लेकर जी रहे हैं। नतीज़ा, दोनों देश पास नहीं आ पा रहे हैं। दिलों में दूरियां होंगी तो सुलह की बातें भी बेमानी लगती हैं। यही कुछ भारत और पाकिस्तान के साथ हो रहा है। बातें सिर्फ दो कौम हिन्दू और मुसलमान की नहीं हैं। जितने मुसलमान पाकिस्तान में नहीं हैं, उससे कहीं ज्यादा हिन्दुस्तान में हैं और यदि बात सिर्फ कौम की ही होती तो फिर दुनिया के अन्य मुस्लिम देश भारत के साथ खड़े नहीं होते।
हिन्दुस्तानी फौज़ ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में तीन किलोमीटर तक भीतर घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की। यह पहली बार है जब किसी सरकार ने राजनीतिक साहस दिखाते हुए इसे स्वीकार भी किया है। दावा किया जा रहा है कि ऐसा पहले भी होता आया है, लेकिन, वो कहावत भी है न कि जंगल में मोर नाचा किसने देखा? वक्त राजनीतिक रूप से टीका-टिप्पणियों का नहीं है। सेना के शौर्य-पराक्रम पर इस साहसिक कदम का सम्मान करते हुए उनका हौसला बनाए रखने का है। उड़ी में कायराना हमले के ठीक 11 दिन बाद भारत की ओर से उठाए इस कदम ने पाकिस्तान पर भारत की जीत का अहसास कराया। महज पाकिस्तानी क्रिकेट टीम पर जीत से जिस भारत में दीवाली मना ली जाती हो, वहां सेना की जीत के मायने क्या हैं, यह सिर्फ सर्जिकल स्ट्राइक ने ही दिखा दिया। चौक-चौराहों पर आतिशबाजी, पटाखों की गूंज, ढोल की थाप और युवाओं का नृत्य आम हो गया था। अवाम, में महज इस छोटे किन्तु महत्वपूर्ण कदम का बहुत पॉजिटिव संदेश गया। यही अवाम चाहती थी, शहीदों के परिवार चाहते थे और यहां तक कि वे लोग भी यही चाहते थे जो कभी हुक्मरान रहे थे। किन्हीं कारणवश वे यह कदम नहीं उठा पाए, या यदि वे मानते हैं कि उन्होंने भी ऐसा कुछ किया किन्तु प्रचार नहीं किया तो वे भी इसकी मुख़्ाालफत नहीं कर पा रहे हैं। हर राजनीतिक दल ने इस कदम का स्वागत किया। भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश ने भी यह कहकर भारत के कदम का समर्थन ही किया है कि भारत को अपनी संप्रभुता और सीमा पर हुए किसी भी हमले का जवाब देने का कानूनी और वैश्विक रूप से स्वीकार अधिकार है।
भारत की ओर से ऐसा कोई कदम उठाया जाएगा, यह पहले से ही महसूस किया जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह बयान मायनेखेज़ था कि हमारे 18 जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। सर्जिकल स्ट्राइस को लोग उन जवानों की शहादत का बदला मान रहे हैं जो उरी अटैक में शहीद हुए। लेकिन यह सिर्फ सर्जिकल स्ट्राइक मानी जानी चाहिए। बदला ऐसा नहीं होता। यह करारा जवाब नहीं, अभी हिसाब बराबर भी नहीं हुआ है। हां, इसे यह माना जाना चाहिए कि यह जरूरी कार्रवाई थी जो पाकिस्तान को उसकी हैसियत दिखाने के लिए होना थी। न तो भाजपा को और ना किसी अन्य राजनीति दल को सेना की इस कार्रवाई के राजनीतिक निहितार्थ निकालना चाहिए। हां, इसे कूटनीतिक सफलता अवश्य मानी जानी चाहिए कि यूएन में भारत ने मजबूती से अपना पक्ष रखा और पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने में बड़ी सफलता हासिल की। अब तो चीन भी इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों को संयम रखने की सलाह दे रहा है। हालात पाकिस्तान के सामने ऐसा पैदा हो गए हैं कि वह न निगल सकता है और ना ही उगल सकता है।
बहरहाल, वक्त खुशियां मनाने का है, लेकिन पूरी मुस्तैदी के साथ। क्योंकि वहशियों को कभी सबक नहीं मिलता। जो झूठी शान और जि़द की ज़द में जीते हैं, वे किसी भी हद में जाते हैं। पाकिस्तान की ओर से भी हलचल होगी, इसका इंतज़ार करना होगा, पूरी तैयारी के साथ उस हरकत का जवाब देने का इंतज़ार करना होगा। संकेत भी ऐसे मिल रहे हैं। जंग हो, ना हो। पाकिस्तान की ओर से कायराना कदम उठेगा जरूर। हमें सतर्क रहना होगा। पहले से ज्य़ादा और कारगर कार्रवाई के लिए रहना होगा तैयार। क्योंकि पाकिस्तान में अभी और भी आतंकी ठिकाने हैं, उनके आका जीवित हैं। जो इसे अपमान मानकर बदले की कार्रवाई अवश्य करेंगे। अभी हिसाब-किताब पूरा होना है। यह केवल ट्रेलर था, फिल्म तो अभी बाकी है।

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