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हर काम की सफलता के पीछे हैं राम, राम बोलो है समिति का मूलमंत्र

हर काम की सफलता के पीछे हैं राम, राम बोलो है समिति का मूलमंत्र

श्रीराम विवाह उत्सव और नि:शुल्क सामूहिक विवाह
पुरानी इटारसी को आकर्षक सजाया

श्रीराम विवाह उत्सव और नि:शुल्क सामूहिक विवाह
पुरानी इटारसी को आकर्षक सजाया
श्रीराम विवाह उत्सव के लिए पुरानी इटारसी को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। श्री देवल मंदिर की शोभा तो देखते बनती है। ओवरब्रिज के पास भव्य द्वार बनाया गया था। मंदिर को आकर्षक विद्युत साज-सज्जा से सजाया गया था। आयोजन स्थल के पास भी भव्य द्वार बनाया गया था।

हर काम की सफलता की पीछे हैं राम
it41216-8श्रीराम विवाह उत्सव तीन दशक से भी अधिक समय से यहां आयोजित किया जा रहा है। श्री द्वारकाधीश मंदिर से बारात करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करके जनकपुरी श्री देवल मंदिर पुरानी इटारसी जाती है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं.
श्रीराम विवाह उत्सव और नि:शुल्क सामूहिक विवाह के आयोजन को देखकर लगता है कि कलियुग में भी यदि व्यक्ति के मन में स्वार्थ का भाव न हो, ईश्वर के प्रति अगाध श्रद्धा और समपर्ण हो तो असंभव सा दिखने वाला काम भी आसान हो जाता है। बस मन में उस काम को सफलता के मुकाम तक पहुँचाने के भाव हों। फिर एक साथ एक ही लक्ष्य लेकर कई सारे लोग कई वर्षों तक बिना किसी मतभेद के चलते रहें तो लगता है कि ईश्वर अवश्य है। पिछले 32 वर्षों में अब तक करीब डेढ़ हजार युवक युवतियों का विवाह संपन्न हो चुके हैं. श्री देवल मंदिर काली समिति के सदस्यों ने गुरू दामोदर दास जी शर्मा सहारनपुर वालों की प्रेरणा से की थी। गुरूदेव ने अयोध्या में ऐसा आयोजन देखा था तो यहां आकर अपने शिष्यों को भी आयोजन की प्रेरणा दी। उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक इस तरह का आयोजन संपन्न नहीं होगा, वे मौन व्रत रखेंगे। प्रथम वर्ष केवल श्रीराम और माता जानकी का विवाह संपन्न कराया था। वे ब्रम्हालीन होने से पूर्व तक हर वर्ष यहां विवाह समारोह में आते रहे थे। उनके साथ ही महंत सुदंरदास रामायणी का समिति को ब्रम्हालीन होने से पूर्व तक मार्गदर्शन मिलता रहा।
it41216-5दूसरे वर्ष गुरू दामोदर जी ने यह प्रेरणा दी कि श्रीराम विवाह के साथ ही यहां गरीब वर वधुओं के विवाह होने चाहिए। तब दो जोड़ों से यह शुरूआत की गयी। तीसरे वर्ष 3, चौथे वर्ष 17, फिर 27 के बाद यह संख्या निरंतर बढ़ती गई सन् 2000 में यहां रिकार्ड 138 जोड़ों के विवाह संपन्न कराये गये। इस आयोजन में देश के किसी भी प्रांत और शहर से विवाह योग्य युवक युवतियों के विवाह उनके परिजनों की मौजूदगी में होता है। इसके लिये उनके पास वैध दस्तावेज होना आवश्यक होता है। समिति इसके लिये कोई शुल्क नहीं लेती, बल्की अपनी तरफ से नवदंपत्ति को पांच बर्तन और पांच जेवर दिये जाते है. इसके अलावा कुछ समाजसेवी लोग अपनी ओर से कुछ देना चाहे तो सामान, घड़ी, कपड़े आदि देकर जाते हैं.

कैसे होता है इंतजाम
श्री देवल मंदिर काली समिति यह इतना बड़ा आयोजन जन सहयोग से करती है. समिति में प्रथम वर्ष से ही कोई पद का सृजन नहीं किया गया। समिति में सारे सदस्य हैं और अपना काम प्रभु की सेवा मानकर करते हैं। गांव-गांव अनाज, सामान, नगद राशि समिति को इस आयोजन के लिये प्राप्त होती है। समिति के पास आयोजन संबंधी सारा रिकार्ड सुरक्षित हैं, काम में इतनी पारदर्शिता की कहीं कोई संदेह की गुंजाइश नहीं होती.

राम बोलो समिति का मूलमंत्र है।
समिति का मूल मंत्र है राम बोलो। जब भी समिति के सदस्य एक दूसरे से मिलते हैं या अन्य किसी भी व्यक्ति से मिलते है, तो उनका अभिवादन राम बोलो होता है। इसी तरह समिति का हरेक सदस्य श्रीराम की सेवा में सदैव तत्पर रहता ह।

कोई निमंत्रण नहीं
समिति का यह आयोजन कभी पुरानी इटारसी तक सीमित नहीं रहा। पवित्र उद्देश्य को लेकर शुरू किये गये इस आयोजन में बिना निमंत्रण सैकड़ों लोग सेवा करने पहुँचते हैं. समिति गांव-गांव, कस्बों कस्बों में प्रचार इसलिये करती है कि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें.

वैदिक रीति से होते हैं विवाह
यहां पूरी तरह वैदिक रीति से विवाह संपन्न कराये जाते हैं। बकायदा मंडप होता है, चीकट होता है, प्रीतभोज होता है, बारात लगती है, अग्नि के सात फेरे सात वचन पाणिग्रहण सब कुछ किया जाता है। समिति वर वधु के साथ उनके परिजनों के ठहरने व भोजन की व्यवस्था भी नि:शुल्क करती है। विवाह वाले दिन जो प्रीतिभोज होता है उसमें वर वधुओं के परिजनों के अलावा शहर के लोग भी शामिल होते हैं।

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