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अभी और जागरूकता की है जरूरत

अभी और जागरूकता की है जरूरत

10 दिसंबर विश्व मानव अधिकार दिवस
इटारसी। आज 10 दिसंबर को विश्व में मानव अधिकार दिवस है।

लेकिन कितने लोग इससे परिचित हैं, कितने लोग मानव अधिकार के विषय में जानते हैं, क्या लोगों को उनके अधिकार मिल रहे हैं़, या फिर केवल कागजों में ये अधिकार दफन हैं? क्या केवल समारोह भर करके अगले वर्ष तक के लिए इस दिन को भुला दिया जाता है? इन सारे विषय पर हमने कुछ लोगों के विचार जानें। आइए, परिचित होते हैं, उनके विचारों से…..

arjun-bholaकांग्रेस के युवा नेता और सर्राफा व्यावसायी अर्जुन भोला ने कहा कि उन्होंने स्कूल -कॉलेज में पढ़ा था कि हमारे मौलिक अधिकार होते हैं जिन्हें हम वहीं पढ़कर भूल गये हंै। आज हमें नहीं मालूम हमारे मौलिक अधिकार कौन-कौन से होते हैं।, अगर हम देखें तो हमारे ही देश में किसी भी नागरिक को उसका समुचित मौलिक हक नहीं मिल रहा है। सुधार और स्वच्छता अभियान चल रहे हैं, फिर भी बच्चों को साफ सुथरा माहौल नहीं मिल रहा है। अस्पतालों की स्थिति भी बहुत दयनीय है, अच्छे डॉक्टर नहीं हैं। पेयजल भी लोगों साफ सुथरा नहीं मिल रहा है। गावों, कस्बों में साफ पानी न मिलने से बच्चों में कुपोषण फैल रहा है। हमारे यहां अच्छे उद्योग की योजना है, ना ही रोजगार के अवसर मिल रहे है। उनका मानना है कि देश की समाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थिति में सुधार होना चाहिए।
raghuvansh-pandeyअधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रघुवंश पाण्डे का कहना है, रोटी, कपड़ा और मकान समाज की मूलभूत आवश्यकताएं हैं। इन तीनों आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हमारे अधिकार और कर्तव्य दोनों एक दूसरे के अनुरूप हैं। हर नागरिक को उसका वाजिव हक नहीं मिल रहा हैं क्योंकि यहां तुष्टिकरण की नीति अपनाई जा रही है। प्रशासनिक, राजनीतिक वोटों से इसका हनन किया जा रहा है। यह हनन गा्रमीण स्तर से राज्य स्तर तक किया जाता हैं और इन सभी चीजों के हम ही जिम्मेदार हैं। हमें अधिकार तो मिल रहे हैं परंतु हम उन कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं। शिक्षा के पीछे कहीं न कहीं आरक्षण, असुरक्षा, केन्द्रीकरण की नीति ये सभी कारण हैं। अच्छी शिक्षा के लिए हर गावों में स्कूल-कॉलेज होना चाहिए ताकि बच्चियों को गांव से बाहर शहर में जाकर न पढऩा पड़े। हर स्कूल पर सरकार का केन्द्रीकरण होना चाहिए ताकि हर स्कूल सरकारी हो, जिससें लोगो में भेदभाव की भावना भी खत्म होगी। साफ सुथरा माहौल नहीं मिल रहा हैं उसके पीछे भी हम ही जिम्मेदार हैं। लोगों का मानना यह है कि घर साफ रहे सड़के भले ही गंदी रहें। सीधी सी बात है कि हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा। घर साफ तो सड़क साफ। यह कर्तव्य अगर आप पालन करते हैं तो हमें हमारे बच्चों को साफ सुथरा माहौल मिल सकेगा।
अस्पतालों में भी सही उपचार नहीं मिल रहा है, मेडिकल में भी आरक्षण की युक्ति बना दी गई है। इन सभी बातों को देखते हुए सरकार का सरकारी अस्पतालों पर केन्द्रीकरण होना चाहिए जिससे सभी लोगों को अच्छे से इलाज मिल सके। साफ पानी भी लोगों को नहीं मिल रहा है, जहां से पानी आता हैं उस मश्ीनों टंकियों की सफाई समय पर नहीं हो रही है। कुटीर उद्योगों की विलुप्ति के कारण रोजगार की हिन्दुस्तान में अकाल मौत हो रही है। जाति के भेदभाव के पीछे देश के नेता जिम्मेदार है, जिस दिन जाति भेदभाव खत्म हो गया उस दिन भारत फिर सोने की चिडिय़ा बन जाएगा। लिंग के आधार पर भी भेदभाव चल रहा है, इसमें भेदभाव खत्म कर समानता का अधिकार होना चाहिए।
ks-uppalप्रोफेसर केएस उप्पल कहते हैं हमारे मौलिक मानव अधिकारों की जानकारी सभी को नहीं होती हैं। जो ज्यादा शिक्षित होता है उन्हें ही अधिकारों की जानकारी होती है। ये तो सभी जानते है कि हमें बहुत सारे अधिकार दिये हैं परंतु कोई आवाज नहीं उठाना चाहता सभी को भय होता है कि अगर हम आवाज उठाएंगे तो हमें कोर्ट कचेहरी के चक्करों में पडऩा पड़ेगा। नागरिकों को वाजिव हक, शिक्षा का अधिकार, साफ सुथरा माहौल, जाति के नाम पर भेदभाव, अमीरी गरीबी, लिंग भेदभाव आदि अधिकार हमें नहीं पा रहे हैं, इसके पीछे हमारा ही दोष है। हमें अधिकार तो मिल रहे हैं परन्तु हमें इसकी सही जानकारी नहीं हैं। अगर किसी को इसकी सही जानकारी है तो वह इन चक्करों में पडऩा नहीं चाहता। मेरा मानना हैं कि अगर शिक्षा का अधिकार, और स्वास्थ्य का अधिकार मिल जाये तो समाज में सुधार हो सकता है। अस्पतालों में सही तरह से इलाज न होने के कारण कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही हैं। रोजगार के अवसर न मिलने से उचित शिक्षा वाले विद्यार्थी शारीरिक श्रम या मजदूरी कर रहे हैं। लिंग के आधार पर भेदभाव हो रहा हैं महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। आजादी की बात कहें तो आजादी संविधान में मिली कानून में मिली पर देश के धरातल पर नहीं मिली और जो मिली वह वैष्वीकरण की नीति अपनाई गई इसके बाद सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीति निरंतर बठती जा रही हैं।
mrskjainगल्र्स कॉलेज की प्राचार्य कुमकुम जैन कहती हैं हमें सारे अधिकार मिल रहे हैं। हमें उनसे अवगत होना है और अपने कर्तव्यों को पहचानना है और अपना हक मांगना हैं। हम खुद अपने अधिकारों से दूर भागते हैं। इसीलिए नागरिकों को वाजिब हक नहीं मिल पा रहे हैं। अमीरी गरीबी, लिंग के आधार पर भेदभाव सब पहले के जमाने में हुआ करता था, पर आज ऐसा नहीं हैं। कहीं-कहीं गावों में भेदभाव होता है। हमें राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक आजादी मिली है। उनकी जानकारी और कर्तव्यों का पालन करना आना चाहिए, हक के लिए थोड़ी महनत तो हमें करनी होगी।
lalu-gourनगर पालिका के पार्षद यज्ञदत्त गौर ने बताया कि मानव अधिकार की जानकारी सभी को है परन्तु विस्तृत रूप से नहीं हैं। शिक्षा में सम्मिलित नहीं हैं सोशल जिंदगी में जाकर इन सभी की जानकारी दी जाती है। नागरिकों को वाजिव हक नहीं मिल रहा हैं क्योकि अधिकारों का सही ज्ञान नहीं है। सभी को साफ सुथरा माहौल कम मिल रहा है। कोशिश जारी है, बाकी जिनके पास पैसा हैं उन्हें साफ सुथरा माहौल मिला, गांव कस्बों में इसकी कमी हैं। अमीर लोगों को चिकित्सा सही तरह से मिल रही, गरीबों को नहीें। पानी भी दैनिक उपयोग के लिए साफ है परंतु पीने योग्य नहीं मिल रहा है। रोजगार के क्षेत्र में शोषण हो रहा हैं। योग्यतानुसार रोजगार नहीं मिल रहा है। अमीरी-गरीबी, लिंग, जाति में भेदभाव पहले से कम हुए हैं, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक आजादी कम मिली, इन सभी अधिकारों को अमीर-गरीब के लिए समान होना चाहिए।

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