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भेजते रहिये शुभ सन्देश

भेजते रहिये शुभ सन्देश

भेजते रहिये शुभ सन्देश

  • भारतभूषण आर गाँधी

कल गुरुवार था, मैंने हर दिन की तरह सुप्रभात का सन्देश अपने निकटतम लोगों और व्हाट्सएप्प के ग्रुपों में कल प्रातः भी पोस्ट किया। रोज़ के सन्देश से अलग बात ये थी की मैंने गुरुवार की सुबह के सन्देश में लिखा *बुधवार, शुभवार* . बस ये ही खास वजह है मेरे इस लेख में कि मैंने ऐसा आखिर क्यों लिखा और मेरे अपनों ने रोज़ की तरह जवाब में क्या लिखा या फिर नहीं लिखा।

पहले बात ये कि गुरुवार को शुभवार बुधवार के मेरे सन्देश के जवाब आखिर क्याआये? तो जानिए साहब, करीब 5-6 सौ में से अधिकांश लोगों ने जवाब ही नहीं दिए, करीब करीब 50 फीसदी लोगों ने कुछ रिस्पांस नहीं दिया यानि सन्देश पढ़ा और फिर अगले के सन्देश को देखने में जुट गए, कुछ लोगों ने अपने कुछ सन्देश कॉपी पेस्ट मुझे पोस्ट कर दिए, बहुत थोड़े लोगों ने मुझे याद दिलाया कि आज बुधवार नहीं गुरुवार है गाँधी जी। इनमें से कुछ ऐसे भी जिन्होंने धन्यवाद भी कहा।

अब मैं बताता हूँ कि मैंने आखिर गुरुवार को शुभ बुधवार का सन्देश क्यों दिया? दरअसल मंगलवार की रात भर मैंने इटारसी से इंदौर की और उसी दिन शाम को वापस आते हुए इटारसी आधीरात तक की रेलयात्रा की। यानि पूरे बुधवार का दिन मैंने अपने इंदौर प्रवास में बिताया। और फिर ठीक अगली सुबह यानि गुरुवार को शुभ बुधवार का मैसेज पोस्ट किया, बाद में जब मुझे जवाब में बहुत कम लोगों के भूल बताने और सिर्फ दो लोगों के धन्यवाद के जवाब मेरे पोस्ट पर मिले।
चलिये अब जो मुझे समझ में आया उसे मैं बता दूं कि जिन दो लोगों के धन्यवाद के मैसेज वापसी में आये उनमें से एक मेरे मित्र का था जो बहुत दिनों बाद इंदौर में रूबरू मिला और दूसरे उस व्यक्ति का था जिसके साथ उनका मार्गदर्शन और सानिध्य प्राप्त करने मैं खुद इंदौर गया था, तकरीबन पूरा दिन उनके साथ रहा। यानि ये वो लोग थे जो मेरे साथ हुई मुलाकात को मेरे लफ्ज़ों में बुधवार को शुभ मान कर धन्यवाद दे गए। जिन चाँद लोगों में गलती की तरफ ध्यान दिलाया वो ऐसे मित्र थे जो मुझसे आगे भूल न हो इसका इशारा कर रहे थे। तकरीबन आधे लोगों मेरे सन्देश को पढ़ा और नज़र अंदाज़ कर गए यानि उनके दिन भी आते जाते हैं उनके पास भी ये सोचने के लिए वक्त नहीं है कि हम किस दिन को आज जी रहे हैं। और जिन ज्यादातर लोगों ने देखा ही नहीं, वो शायद निजी व्यस्तता, नेटवर्क प्रॉब्लम या डाटा बैलेंस की प्रॉब्लम के कारण देख नहीं सके।

मैं जिन लोगों के कारण इस लेख को लिख पाया, उन सबका धन्यवाद प्रकट करते हुए सबसे ज्यादा अपनी चिंता उन लोगों के लिए करते हुए अपनी बात ख़त्म करना चाहता हूँ कि कभी भी ऐसे किसी सन्देश को नज़र अंदाज़ न करें जो किसी अपने ने स्वयं के टेक्स्ट मेसेज से भेजे हों, कम से कम एक फूल या सन्देश का इमोजी सिग्नल तो देना ही चाहिए। साथ ही मैं उन दो लोगों का कोटिशः धन्यवाद देना चाहूंगा जिनके साथ बीते हुए दिन को चाहे वो एक दिन पहले बीता हो या दो दिन पहले बीता हो को शुभ माना। उनका भी धन्यवाद जिन्होंने मुझे गलती सुधार के लिए चेताया, ऐसे लोग हमेशा याद रखने लायक होते हैं, उनकी सलाह से आप ज्यादातर गलतियां करने से बच सकते हैं। बाकी लोग जो बच गए वो किसी भी प्रकार से आपके अपराधी नहीं हो सकते, सब अपनी परिस्थिति के शिकार हैं, दोषी तो कतई नहीं। इसलिए रोज़ जैसे और जिनको देने के लिए आपके पास शुभ सन्देश हैं भेजते रहिये।।

bbr-gandhi

 

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