हवा-पानी ने लिखी किसान की बर्बादी की कहानी

हवा-पानी ने लिखी किसान की बर्बादी की कहानी

अभी किसानों को और सतायेगा मौसम, हवा और ओले की भी संभावना
इटारसी। सुबह लोगों को हल्की बारिश और तेज हवा ने जगाया। करीब ६:१५ बजे आसमान पर घने काले बादल आये और रात की तरह अंधेरा छा गया। ८:२० बजे से तेज हवा और पानी ने किसानों की बर्बादी की कहानी लिखनी शुरु कर दी। ये मौसम हरदा, होशंगाबाद सहित प्रदेश के कई जिलों का था। पानी तेज हवा के साथ ऐसा गिरा जैसे भादौ की मानसूनी बारिश हो। इस बारिश से खेतों में खड़ी किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। अचानक बदले इस मौसम ने गेहूं, चना सहित अन्य फसल चौपट कर दी। आज लगभग सारा दिन आसमान पर बादल छाये और गडग़ड़ाहट होती रही।
उल्लेखनीय है कि होशंगाबाद जिले में अभी गेंहू की ठीक से कटाई शुरू भी नहीं हुई है। अभी दो दिन पूर्व ही कुछ किसानों का गेहूं कटना प्रारंभ ही हुआ है। लेकिन, यह एक प्रतिशत भी नहीं है। लगभग संपूर्ण क्षेत्र में गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है और बारिश से गेंहू की फसल को बहुत अधिक नुकसान होना बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि कुछ दिनों पहले हुई ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो चुका था, बची हुई फसलों को आज २७ मार्च को हुई बारिश ने खराब कर दिया। युवा किसानों का कहना है कि आज सुबह करीब साढ़े सवा ८ बजे आसमान में छाया अंधेरा, संभवत: उनकी पीढ़ी ने पहली बार देखा था। करीब २० मिनट तक बादलों की लगातार गडग़ड़ाहट के बाद बारिश के साथ आये उजाले ने सबकुछ सामान्य किया।
किसानों पहले ही दु:खी है। क्षेत्र में गेहू आदि की कटाई का कार्य चालू हो गया है लेकिन आज सुबह से ही मौसम ने करवट बदल ली जिससे गेहं,ू चना आदि की फसल जो कटाई के लिए तैयार खड़ी है, जिसमें काफी नुकसान के साथ किसानों की समस्या और बढ़ा दी है। ग्राम पर्रादेह के कन्हैयालाल वर्मा ने बताया कि इस वर्ष कोरोना वायरस के कारण देश संकट से जूझ रहा है और पंजाब व अन्य स्थानों से हार्वेस्टर भूसा मशीन नहीं पहुंच पायी है। अब तक बड़ी संख्या में हार्वेस्टर और भूसा मशीनें आ जाती और गेहंू की ५० प्रतिशत कटाई हो जाती थी जो कि एक प्रतिशत भी नहीं हो पाई है।


किसानों के लिए आफत की बारिश
सुबह सुबह हुई तेज आंधी एवं आफत की बारिश से किसानों की फसलें खराब हो गयी। माना जा रहा है कि आज की बारिश ने फसलों में ७० फीसद नुकसान कर दिया है। किसानों ने बताया कि इस वर्ष लगभग ३ बार चली आंधी एवं बारिश से फसलें चौपट हो गयी जिससे किसान आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान हैं। तहसील के अंतर्गत बारिश से कांदई हिम्मत, लोहारिया, रूपापुर, गजपुर, बिछुआ मलोथर, टांगना, तीखड़, भट्टी, तालपुरा, नयागांव, रामपुर, गुर्रा, दमदम, सनखेड़ा, मरोड़ा, जुझारपुर, देहरी, चिल्लई, सिलारी, घोघरी, नांदनेर, खापा, सोमलवाड़ा, सोनतलाई सहित अनेक गांवों में फसलें बिछ गयीं हैं। तेज आंधी और बारिश से फसलें गिर गयी है। ऐसे में गेहूं उपार्जन के समय में सोसायटियों के द्वारा एफएक्यू के आधार पर गुणवत्ताहीन बताकर निरस्त किया जाएगा तथा अनेकों बार ग्रेडिंग करके किसानों के ऊपर अतिरिक्त खर्च आएगा तथा लागत मूल्य निकालना भी मुश्किल होगा। दमदम के किसान मोहम्मद सद्दाम ने बताया कि उसके खेत की लगभग ७० प्रतिशत गेहंूं की खड़ी फसल गिर गयी जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है, अब लागत निकालना भी मुश्किल होगा। ग्राम कांदई हिम्मत के किसान मोरसिंह राजपूत ने बताया कि क्षेत्र में हुई बारिश से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। अब आगामी समय में किसानों को अपनी आजीविका चलाने हेतु अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा। ऐसी विषम परिस्थितियों में यह आफत की बारिश साबित हुई है। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष श्रीराम दुबे ने मांग की है कि शीघ्र ही प्रशासन के द्वारा बारिश और आंधी से नुकसान हुई फसलों का सर्वे कराकर शासन के द्वारा संपूर्ण तहसील के किसानों को उचित राहत राशि प्रदान की जाए।

मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को सुबह तक के पूर्वानुमान में बताया है कि अभी होशंगाबाद संभाग में कहीं-कहीं वर्षा या गरज-चमक के साथ बौछारें हो सकती हैं। होशंगाबाद और बैतूल में गरज-चमक के साथ तेज हवा करीब ४०-५० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं तथा अल्पकालिक ओलावृष्टि का भी अनुमान है। यह भी माना जा रहा है कि २९ और ३० मार्च को भी मौसम में विशेष परिवर्तन होने की उम्मीद नहीं है। पिछले चौबीस घंटे में होशंगाबाद संभाग में वर्षा दर्ज की गई है जिससे अधिकतम तापमान में गिरावट आयी है। जहां शुक्रवार को होशंगाबाद का अधिकतम तापमान ३५.८ और न्यूनतम २२ डिग्री सेल्सियस रहा वहीं २७ मार्च को अधिकतम तापमान गिरकर २९.९ तथा न्यूनतम तापमान में कोई परिवर्तन नहीं रहा।


हवा ने गिराया पेड़
सुबह तेज हवा के साथ बारिश हुई। हवा इतनी तेज थी कि रेलवे स्टेशन परिसर में सायकिल स्टैंड परिसर में लगा पेड़ धराशायी हो गया। हालांकि इस दौरान वहां कोई मौजूद नहीं था तो कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। इसी तरह से शहर में अन्य स्थानों पर भी पेड़ गिरने की घटनाएं हुई हैं।

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