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केन्द्र के एफडीआई पर फैसले पर उठाए सवाल

अब देश की संपत्ति असुरक्षित, विदेशी ब्रोकरों के माध्यम से होगा प्रॉपर्टी व्यापार
इटारसी। विदेश निवेश नीति में बदलाव करके केन्द्र सरकार द्वारा रियल स्टेट ब्रोकिंग और सिंगल ब्रांड रिटेल में शत-प्रतिशत निवेश (100 प्रतिशत एफडीआई) की अनुमति देश के लिये आत्मघाती कदम है और भारत आ जाने से देश की संपत्तियों को विदेश में गिरवी रखने से कोई नहीं रोक सकता। उक्त आक्षेप कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव, अधिवक्ता रमेश के साहू ने लगाये हैं।
श्री साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में विदेश नीति में के संबंध में जो निर्णय लिया है उस पर पुनर्विचार हो ताकि देश की संपत्ति को बचाया जा सके। पूर्व में जहां अनुमति के बाद विदेशी निवेश होता था वहीं अब केवल रिजर्व बैंक को सूचना देकर शत-प्रतिशत विदेशी निवेश हो जावेगा। नोट बंदी और जीएसटी के दुष्प्रभावों के चलते रियल स्टेट बिजनेस बंद पड़ा है और अब विदेशी रियल स्टेट ब्रोकिंग कंपनीयों के बे-रोकटोक भारत में पैर पसारने से वे ब्रोकिंग के नाम पर भारतीय प्रोजेक्टों को फाइनेंस के दम पर टेक ओवर करेंगे और भारतीय संपत्तियों को गिरवी रखेंगे कह सकते हैं कि पीछे के दरवाजे से देश गिरवी रखे जाने का रास्ता खोला है, जो देश के लिए घातक है।

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