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प्रेम में विशुध्द समर्पण हो : दीक्षित

प्रेम में विशुध्द समर्पण हो : दीक्षित

श्रीराम कथा का आयोजन
इटारसी.
विवाह एक धार्मिक संस्कार है, विवाह भोग के लिए नहीं योग के लिए होता है. भगवान राम ने जनमानस को यही संदेश दिया है. प्रेम वासना की चीज नहीं बल्कि प्रेम में विशुध्द समर्पण होना चाहिए. आज समाज का प्रेम वासना से भरा हुआ है. भगवान राम और कृष्ण का प्रेम विशुध्द प्रेम था. यह बात महर्षि नगर में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान आचार्य नवलेश दीक्षित ने कही.
उन्होंने कहा कि भगवान राम ने हमेशा ही अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया था और वह अपने माता-पिता का बहुत सम्मान करते थे. हमें भी अपने माता-पिता की सेवा और सम्मान करना चाहिए. कथा के दौरान श्रीराम विवाह का आयोजन किया गया. इस मौके पर भगवान राम और माता सीता की सुंदर झांकी बनाई गई. रामकथा के दौरान श्रीराम की बारात निकाली जिसमें श्रध्दालु जमकर थिरके. समापन अवसर पर आचार्य ने कहा कि देशक को संघर्ष करने वाले व्यक्तियों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि मानस के तीन सोपान हैं. पुरुषार्थ, प्रार्थना और प्रतीक्षा. ये जीवन के तीन सूत्र हैं. ये जीवन में आ जाएं तो मानव को कोई दुखी नहीं कर सकता. सच्चा प्रेम व्यक्ति को स्थित कर देता है. आज का मानव अपने दुख से दुखी नहीं बल्कि पड़ोसी के सुख से दुखी है. उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन संघर्ष से भरा हुआ था, लेकिन उनके चेहरे से प्रसन्नता नहीं गई. आज राष्ट्र को रोते हुए आदमी की जरूरत नहीं, दुख और पीड़ा सहकर हंसाने वाले व्यक्ति की आवश्यकता है. प्रभु चित्रकूट में 11 वर्ष तक रहे इसलिए वहां की भूमि आज भी साधना को स्पर्श करती है. कथा समापन के साथ भगवान राम का रायाभिषेक किया गया. व्यास गादी की पूजा सुनील पाठक और रघुवंश पांडे ने की.

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