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फीस निर्धारण कर स्कूल की दीवार पर अंकित करें – कलेक्टर

फीस निर्धारण कर स्कूल की दीवार पर अंकित करें – कलेक्टर

होशंगाबाद। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने जिले की सभी अशासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल एवं हायर सेकेन्ड्री स्कूल के प्राचार्य एवं शाला प्रभारियों तथा संचालकों को निर्देशित किया है कि वे प्रतिवर्ष स्कूल के बच्चों की तय की जाने वाली फीस जो पालकों से ली जाती है का निर्धारण कर अपने विद्यालय की बाहय दीवार पर अंकित करें। कलेक्टर ने कहा कि बच्चो के प्रवेश के साथ ही वर्तमान शिक्षण वर्ष में ली जाने वाली समस्त प्रकार की राशि का विवरण कराकर सौपा जाए। कलेक्टर ने सभी अशासकीय शालाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के बस्ते का बोझ कम करने एवं पालकों की जेब का खर्च कम करने हेतु अशासकीय शालाओं को एनसीईआरटी एवं म.प्र.पाठॠ पुस्तक निगम द्वारा मुद्रित पुस्तकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि निर्धारित प्रकाशक एवं पुस्तकों की सूची विद्यालय के सूचना पटल एवं बाहय दीवार पर चस्पा की जाए और यह सूची शहर के कम से कम 5 पुस्तक विक्रेताओं को उपलब्ध कराई जाए। सूची की एक प्रति बीआरसीसी, डीपीसी एवं डीईओ को भी दी जाए। प्रतिवर्ष पाठय पुस्तकों को ना बदला जाए।
श्री लवानिया ने अशासकीय शालाओं को निर्देश दिए हैं कि वे प्रतिवर्ष पाठय पुस्तकों को न बदलें। उन्होने प्रत्येक शाला में पालक शिक्षक संघ का गठन अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने विद्यालयों के शिक्षा पोर्टल पर नामांकन (मैपिंग) एवं प्रोफाइल अपडेशन पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि अशासकीय विद्यालय हेतु नवीन मान्यता एवं मान्यता नवीनीकरण की कार्यवाही तथा सीबीएसई तथा आईसीएसई विद्यालय हेतु एनओसी के लिए ऑनलाईन प्रक्रिया अपनाई जाए तथा अशासकीय शालाओं में अध्ययनरत समस्त बच्चों एवं समस्त शैक्षणिक, कार्यालयीन कर्मचारियों का आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक अकान्ट नम्बर अनिवार्य रूप से संधारित की जाए।
उल्लेखनीय है कि अशासकीय शालाओं के बच्चो के पालकों ने कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर बताया था कि अशासकीय शालाओं के संचालकों द्वारा मनमाने तरीके से फीस की बढ़ोतरी की जा रही है। अशासकीय शालाओं के संचालकों द्वारा एनसीआरटी, एससीईआरटी पाठक्रम की पुस्तकें न चलाकर प्रायवेट प्रकाशकों की पुस्तकें चलाई जा रही है जो कि बहुत ही ऊंचे दामों पर मिलती है। एक प्रायवेट स्कूल द्वारा नियत की गई किसी एक ही दुकान से उन्हें बेंचा जाता है। पत्र में पालकों ने शहर के एक निजी स्कूल एवं बुक डिपो का उदाहरण भी प्रस्तुत किया था। पालकों ने यह भी शिकायत की थी कि पालकों से प्रायवेट स्कूल संचालक वर्ष भर आयोजनों, परीक्षा, फाईन आदि के नाम पर राशि वसूलते हैं और मनमाने तरीके से स्कूल के सत्र को प्रारंभ करते है एवं अपनी सुविधानुसार बच्चों की छुट्टियां घोषित करते हैं।

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