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ईश्वर प्राप्ति ही मानव जीवन का मूल उद्देश्य रहे : दुबे

ईश्वर प्राप्ति ही मानव जीवन का मूल उद्देश्य रहे : दुबे

इटारसी। न्यूयार्ड आजाद नगर स्थित दुर्गा मंदिर में आयोजित श्री मद् भागवत कथा के पांचवे दिन भगवान कृष्ण और गीता से जुड़े रोचक प्रसंगों का हवाला देते हुए कथाकार पं. रजनीश दुबे ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। हरिद्धार से आए कथाकार दुुबे ने कहा कि कथा प्रवचन से श्रेष्ठ सत्संग होता है, जो अद्वितीय है। पूरी सृष्टि में पांच अस्तित्व हैं, संसार, शरीर, जीव, आत्मा और परमात्मा की अलग-अलग जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा ईश्वर को आध्यात्म से जाना जाता है। परमात्मा को तत्वज्ञान नामक विधान से जाना जाता है। आत्मा ईश्वर को देखने के लिए दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है और परमात्मा परमेश्वर को देखने के लिए तत्व दृष्टि की जरूरत है। जीव की मंजिल मुक्ति अमरता मोक्ष केवल भगवान की प्राप्ति से ही मिलता है। धर्मक्षेत्र के अनेक रहस्यों को यहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने आत्मसात किया। भागवत कथा के दर्शन शास्त्र का अनूठे ढंग से वाचन कराते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर प्राप्ति ही मानव जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए।

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