Breaking News

पं. भवानी प्रसाद मिश्र

जन्म    – सन् 1913 ग्राम टिगरिया, तहसील सिवनीमालवा, जिला होशंगाबाद मध्यप्रदेश
निधन – 20 फरवरी 1985

जीवन
काव्य रचना की शुरूआत सन् 1930 में की. पहली काव्य रचना हाई स्कूल में अध्ययन के दौरान लिखी. साहित्य जगत में भवानी भाई और घर में मन्ना भाई के नाम से प्रसिध्दता प्राप्त की.
1932-37 के बीच नर्मदा तट पर कालेज जीवन में अपनी प्रसिध्द कविता ‘सन्नाटा’ और सन् 1939 में ‘सतपुड़ा के जंगल’ लिखी. भवानी प्रसाद मिश्र दूसरे तार सप्तक के एक प्रमुख कवि हैं. मिश्रजी विचारों, संस्कारों और अपने कार्यों से पूर्णत: गांधीवादी है. गांधीवादी की स्वच्छता, पावनता और नैतिकता का प्रभाव और उसकी झलक भवानीप्रसाद मिश्र की कविताओं में भी देखी जा सकती है. मिश्रजी का प्रथम संग्रह ‘गीत फरोश’ अपनी नई शैली, नई भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुआ है.
मिश्र जी ने अपने साहित्यिक जीवन को बहुत प्रसारित नहीं किया है. उनकी कविताओं की प्रमुख विशेषता कथन का सहज, सरल और सादगी भरा होना है. वे बहुत गहरी से गहरी बात भी बहुत हलके-फुलके ढंग से कह देने में सक्षम हैं.
वे मौन निश्छलता के साथ साहित्यिक रचना में संलग्न हैं. यही कारण रहा है कि उनके कम काव्य संग्रह प्रकाशित हो पाए हैं.

रचनाएं
             काव्य संग्रह

                       गीत फरोश, चकित है दुख, अंधेरी कविताएं आदि.
प्रसिध्द कृति

सतपुड़ा के जंगल

सतपुड़ा के घने जंगल नींद में डूबे हुए से,
ऊंघते अनमने जंगल
झाड़ ऊंचे और नीचे
चुप खड़े हैं आंख मीचें,
घास चुप है काश चुप है
मूक शाल, पलाश चुप है
बन सके तो धंसो इनमें,
धंस न पाती हवा जिनमें,
सतपुड़ा के घने जंगल
नींद में डूबे हुए से ऊंघते अनमने जंगल.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!