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माखनलाल चतुर्वेदी

जन्म     –   4 अप्रैल 1889 (चैत्र शुक्ल संवत 1945 वि.), बाबई, जिला होशंगाबाद, मप्र
निधन    –   30 जनवरी 1968
उपनाम –   एक भारतीय आत्मा

शिक्षा
प्रारंभिक शिक्षा बाबई में हुई. स्वाध्याय के बल पर अंग्रेजी, संस्कृत, बंगला, मराठी, गुजराती का ज्ञान प्राप्त किया.

योगदान
वे राष्ट्रीय काव्यधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि थे. आपने कर्मवीर तथा अन्य प्रतिष्ठित पत्रों के संपादन का कार्य किया. ब्रिट्रिश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रचार कर युवा पीढी क़ो स्वतंत्रता आंदोलन के लिए तैयार किया.
आपकी पहली रचना ”रसिक मित्र” ब्रजभाषा में प्रकाशित हुई. आपकी रचनाएं खड़ी बोली में है तथा उर्दू के शब्दों को अपनाया गया है, जिससे आपकी शैली भावप्रधान हो गई है. चतुर्वेदी के काव्य को चार श्रेणियों में रखा जा सकता है- राष्ट्रीयता, प्रेम, प्रकृति और अध्यात्म.
भोपाल का पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय उन्हीं के नाम पर स्थापित है. उनके काव्य संग्रह ”हिमतरंगिणी ” के लिए उन्हें 1955 में हिंदी के ”साहित्य अकादमी” पुरस्कार से सम्मानित किया गया. अन्य उपाधियों के साथ सन् 1962 में भारत सरकार ने आपको ”पदमभूषण” की उपाधि से सम्मानित किया.
प्रसिध्द कृति

    काव्य कृतियां
             हिमकिरीटनी, हिमतरंगिणी, युग चरण, मरण ज्वार, माता, वेणु लो गूंजे धरा इत्यादि.
    गद्य कृतियां
               कृष्णार्जुन युध्द, साहित्य के देवता, अमीर इरादे : गरीब इरादे इत्यादि.

 प्रसिध्द कृति

                     चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं
                     चाह नहीं प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं
                     चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊं
                     चाह नहीं देवों के सिर पर चढूं भाग्य पर इतराऊं
                     मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर तुम देना फेंक
                    मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाए वीर अनेक.

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