चेहरा नहीं चरित्र का निर्माण करें: नागर

इटारसी। कहते हैं ठोकर लगने के बाद ही ठाकुर बनते हैं, अर्थात मनुष्य को जब पांव में ठोकर लगती है और दर्द होता है तभी वह सीख पाता है। जो हुआ, जैसा हुआ, अच्छा हुआ। जब जहां हो गया, अच्छा हुआ। संत शिरोमणि नरसी मेहता, सुदामा चरित्र को संगीत मय ढोलक ओर तबलों की थाप के साथ आचार्य प्रवर भृगु सिद्ध पं. नरेंद्र नागर ने पिछले 6 दिनों से वृन्दावन गार्डन में श्री भट्ट परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के सातवें और समापन दिवस के अवसर जारी कथा प्रसंग में श्रीकृष्ण भक्ति का सार समझाते हुए कही। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य के कई चेहरे हैं, वह नित नए-नए चेहरे बनाकर समाज के सम्मुख प्रस्तुत होता है, जबकि प्रभु मनुष्य का चेहरा नहीं, चरित्र और भक्ति देखते हैं। आज चेहरे से ज्यादा हमें चरित्र निर्माण की ओर अग्रसर होना होगा। जो आज दिखाई नहीं दे रहा है, लोग बस चेहरा संवारने में तल्लीन हैं। इस दौरान विधायक डॉ सीताशरण शर्मा भी व्यास पीठ पर पहुंचे औऱ आशीष प्राप्त किया। पंडित नागर ने रसमय गीत संगीत में प्रस्तुत श्रीराधा कृष्ण नाम भजन संकीर्तन और अंत में भृगु ऋषि द्वारा प्रतिपादित गायत्रीमंत्र से पूर्णाहुति अनुष्ठान संपन्न कराया।
कथा समापन पश्चात आचार्य श्री ने सभी ज्ञात अज्ञात सहयोगियों को सम्मानित कर आशीष दिया। इस दौरान आयोजित श्री राधाकृष्ण के भंडार को भक्तों के लिए खोल दिया गया जहां कथा स्थल में पहुंचे हजारों भक्तों ने प्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान पंडित नागर के शिष्य बंटी महेश्वरी ने भजन प्रस्तुत किये। अंत में आयोजक भट्ट परिवार की ओर से गजेंद्र दुबे नसरुल्लागंज ने सभी भक्तों, मीडिया तथा प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

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