पत्रकारिता के आईकॉन मदनमोहन जोशी

पत्रकारिता के आईकॉन मदनमोहन जोशी

देश की पत्रकारिता को अपनी उपस्थिति से नई ऊंचाई और पहचान देंने वाले मूर्धन्य पत्रकार मदन मोहन जोशी को हमसे बिछुड़े हुए 25 मई 2020 को 5 बरस हो गये।  सहसा  कालजयी गायक मन्ना डे  का गीत ‘काल का पहिया घुमे भैया लाख तरह इनसान चले एक चले बारात कभी तो कभी बिना समा न चलेÓ याद आ जाता है। पत्रकारिता के आईकॉन मदन मोहन जोशी अपने जीवन का सब कुछ देकर इसी तर्ज पर बिना समान दुनिया से विदा हो गये। पत्रकारिता जगत को नई भाषा शैली और मोहक मुहावरे से समृद्ध करने और संवारने में उनका बड़ा योगदान रहा। मूलत: हरदा निवासी भोपाल के सैफिया कालेज में प्रोफसर थे और प्रसिद्ध न्यूज एजेंसी इंफा के प्रदेश  प्रतिनिधि थे। उनके लेखों की धूम थी। उनके समसामयिक लेखों से प्रभावित होकर उन दिनों के प्रमुख नई दुनिया पत्र समूह ने   उन्हें भोपाल ब्यूरो प्रमुख बनाया। उनके प्रतिभा सूर्य ने अच्छे-अच्छे को अपनी लेखनी का मुरीद बना दिया। राजनेता, ब्यूरोक्रेट्स, आला जहीन लोग सब उनके प्रति श्रद्धा भाव रखते थे। इतना बड़ा आभामंडल होने के बाद भी वे सहज, सरल, आत्मीय, विनम्र व्यक्ति थे। छोटा, बड़ा कोई भी, सबकी मदद को तत्पर रहते थे। मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे उनका स्नेह सदा मिलता रहा। भास्कर संवाददाता होने के बावजूद मेरे लेख नईदुनिया या नव भारत टाइम्स में छापने उन्हें कोई गुरेज नहीं था। बल्कि तारीफ करते थे। मेरे बड़े भाई भोपाल के साहित्यकार आकाशवाणी के सेवानिवृत अधिकारी मनोहर पटेरिया मधुर से भी उनकी मित्रता थी। बाद में भोपाल नई दुनिया संस्करण के वे संपादक भी रहे। बाबा तुलसीदास और रामायण के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा थी। इसी के चलते मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के मंत्री मंडल के मंत्री पंडित शंभूनाथ शुक्ल, तात्कालिक पंचायत सचिव मानसविद  गोरेलाल शुक्ल जी के सहयोगी बनकर उन्होंने रामायण की श्रंखला शरू की थी जिसमें प्रवचन करने मानस मर्मज्ञ पंडित रामकिंकर जी सहित अनेक विद्वान प्रवचन करने आते थे। भोपाल के कल्चरल पर लिखी उनकी किताब पतियों की परी कथा चर्चित रही है। पीडि़त मानवता को उन्होंने कैंसर हॉस्पिटल के रूप में नायाब तोहफा दिया है जिसे आज आदरणीय आशा जोशी जी कुशलता से संचालित कर रही हैं। इटारसी के प्रमखु पत्र नगरकथा का लोकार्पण जोशी ने किया था। प्रो डॉ कश्मीर उप्पल और हम मित्र उनके उस समय के उद्बोधन को स्मरण कर आज भी अभिभूत हो जाते हैं।
– पंकज पटेरिया, वरिष्ठ पत्रकार,
   कवि होशंगाबाद 9893903003
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