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पिज्जा की तरह हाजमा खराब कर रही पाश्चात्य संस्कृति

Picture 009नर्मदांचल से बातचीत में नृत्यांगना सुरभिसिंह ने कहा
इटारसी. हमारी संस्कृति विश्व की महान संस्कृति है, जिसे हमारी युवा पीढ़ी के लोग नहीं अपना रहे हैं. युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की दीवानी है जबकि विदेशी लोग हमारी संस्कृति को अपना रहे हैं. पाश्चात्य संस्कृति और हिन्दुस्तानी संस्कृति के विषय में उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसी हमारी संस्कृति की खिचड़ी हाजमा ठीक रखती है और पाश्चात्य संस्कृति का पिज्जा पेट खराब करता है. उसी तरह हमारी कला वास्तव में संस्कार से परिपूर्ण है जबकि पश्चिम से हमारे संस्कार प्रभावित हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि वे अब तक यूएस, फ्रांस, लंदन सहित विश्व के करीब 50 देशों में कत्थक नृत्य का कार्यक्रम दे चुकी हंैं. उन्होने बताया कि विदेशी लोग हमारी संस्कृति और कला के मुरीद हैं. लखनऊ घराने की कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह न यह बात यहां एक मुलाकात के दौरान कही. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही वे सुंदरकांड पर एक नया कंसेप्ट लेकर आ रही है जिसमें 50-60 कलाकारों की टीम कथक के माध्यम से इसे प्रस्तुत करेंगी जो हमारा अब तक का सबसे बेहतरीन प्रोग्राम होगा. इसमें लखनऊ और मुंबई की कलाकार शामिल रहेंगे. जनवरी से अप्रैल के बीच देश के लगभग 35 स्थानों पर हम यह प्रस्तुति देंगे. कई अवार्ड जीत चुकी सुरभि सिंह ने बताया कि उन्हें नेहरु युवा केन्द्र द्वारा नेशनल गोल्ड अवार्ड, श्रंगारमणि अवार्ड मुंबई, विदादीन महाराज अवार्ड जिन्होंने पंद्रह सौ ठुमरी की रचना की है, से भी नवाजा जा चुका है. वे बचपन से ही नृत्य के प्रति लगाव था. हालांकि अल्पायु में ही उनके माता-पिता का देहांत हो जाने की वजह से उन्हें यहां आने में देर हुई परंतु अपनी इस उपलब्धि को अपने माता पिता का आशीर्वाद ही मानती हें तथा अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरु अर्जुन मिश्रा को देती हैं जिन्होंन भातखंडे केसरबाग से लखनऊ घराने में शामिल किया है. जमानी वे दूसरी बार आयी हैं. तीन वर्ष पूर्व वे यहां आ चुकी हैं. जमानी को लेकर उन्होंने कहा कि यह स्थान वास्तव में एक मंदिर है, जहां एक अजीब सी सकारात्मक उर्जा है विद्यमान है जो यहां एक बार आता है, उसे बार-बार आने का मन करता है. यहां के लोग भी कला प्रेमी हैं. यहां के कुछ लोग ही हजारों की तरह हैं. यहां के लोग कला की बारीकी को समझते हैं. उन्होंने बताया कि आज की प्रस्तुति में वे कथक की विभिन्न विधाओं से काली के शिवशक्ति रूप के विशेष स्वरूप का वर्णन तथा बिहारी का दादरा, कन्हैया, राधा और मीरा को लेकर मध्यम धु्रपद में नयी बंदिश के साथ कजरी पेश की जाएगी. इसमें विशेष रूप से नहीं आए घनश्याम, घिर आयी बदरी के अलावा अन्य शास्त्रीय प्रस्तुतियां के साथ-साथ गजल, बड़े नादां हैं जो शोले को हवा देते हैं, जुर्म-ए-उल्फत की लोग हमें सलाह देते हैं. को कथक नृत्य शैली में पेश करेंगी. उन्होंने बताया कि वह ठाकुर परिवार से हैं जहां परिवार में पर्दाप्रथा आदि का प्रचलन हैं. ऐसे में उन्होंने देश की सभी बेटियों से कथक नृत्य अपनाने और इसमें अपने सहयोग की अपेक्षा करने वालों को सहयोग की बात कही है. उन्होंने बताया कि वह बादशाहपुर में कथक नृत्य को लेकर पांच सौ गरीब बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं. उनका एनजीओ कल्चरल केविस्ट भी इस हेतु सदैव तत्पर रहता है.

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