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रक्षाबंधन की पूर्णिमा पर अंतरिक्ष में दिखेगा ‘ब्लड मून’, 96.3 फीसद ढकेगा चांद, भारत में नहीं दिखेगा

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  • नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने दी जानकारी, दिन का समय होने से भारत में दृश्यता रहेगी शून्य
  • 15 दिन में दूसरे ग्रहण पर भ्रांतियों को किया खारिज : हर ग्रहण जोड़ी में ही आता है, इसमें कोई अनिष्ट या अनोखी बात नहीं

इटारसी। रक्षाबंधन की पूर्णिमा के अवसर पर अंतरिक्ष में एक दुर्लभ खगोलीय घटना घटित होने जा रही है। इस दौरान डीप पार्शियल लुनर इकलिप्स (गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण) लगेगा, जिसमें चंद्रमा का 96.3 फीसद हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में छिप जाएगा। इस वजह से चांद तांबे जैसा लाल यानी ब्लड मून दिखाई देगा।

नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह के समय घटित होगा। इस दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा, जिसके कारण यह ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा।

विश्व की 41 फीसद आबादी बनेगी इस नजारे की साक्षी

सारिका घारू के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस स्थिति में आती है कि पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा को पूरी तरह नहीं ढक पाती, बल्कि उसके अधिकांश भाग को ढकती है, तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं। एक गणितीय अनुमान के मुताबिक, विश्व की लगभग 41 प्रतिशत जनसंख्या इस नजारे को देख सकेगी।

कहां-कहां दिखेगा : उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिम अफ्रीका और अटलांटिक महासागर के कुछ भागों में यह ग्रहण स्पष्ट देखा जा सकेगा।

चंद्र ग्रहण की समय सारणी (भारतीय समयानुसार)

  • आंशिक ग्रहण आरंभ : सुबह 08:03:54 बजे
  • आंशिक ग्रहण समाप्ति : दोपहर 11:21:59 बजे
  • कुल अवधि : लगभग 03 घंटे 18 मिनट

15 दिन में दो ग्रहण के अंधविश्वास पर वैज्ञानिक तथ्य

12 अगस्त को हुए सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद यह चंद्र ग्रहण लग रहा है। सोशल मीडिया पर 15 दिनों के भीतर दो ग्रहण होने को लेकर अनिष्ट या अशुभ होने की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। इस पर वैज्ञानिक तथ्य सामने रखते हुए सारिका घारू ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कोई भी ग्रहण अकेला नहीं आता है। हर ग्रहण हमेशा जोड़ी के रूप में 15 दिनों के अंतराल पर ही घटित होता है। आज तक जितने भी ग्रहण हुए हैं, उनके 15 दिन के अंतर पर दूसरा ग्रहण होता ही है। इसलिए 15 दिन के अंतर से ग्रहण होना कोई अनिष्टकारी या अनोखी घटना नहीं है।

आगामी ग्रहणों की स्थिति

  • 06 फरवरी 2027 : वलयाकार सूर्य ग्रहण (भारत में अदृश्य)
  • 20-21 फरवरी 2027 : उपछाया चंद्रग्रहण (भारत में दिखेगा, लेकिन धार्मिक/शास्त्रीय मान्यता नहीं)
  • 02 अगस्त 2027 : पूर्ण सूर्यग्रहण (भारत में आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में दिखेगा)
  • 16-17 अगस्त 2027 : उपछाया चंद्रग्रहण (भारत में अदृश्य)

Manju Thakur

मंजू ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार एवं Narmadanchal.com के संस्थापक-संपादक हैं। वे वर्ष 2004 से नर्मदांचल क्षेत्र और मध्य प्रदेश की स्थानीय, सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़ी खबरों का संपादन और प्रकाशन कर रही हैं। उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से संस्कृत में स्नातकोत्तर, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक तथा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। पत्रकारिता के साथ-साथ वे डिजिटल मीडिया, समाचार संपादन एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अनुभव रखती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुँचाना है।

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