इटारसी। क्या भारतीय कृषि अब रसायनों और महंगे खादों के चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए तैयार है? इस दिशा में देश की संसद में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। होशंगाबाद-नरसिंहपुर क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी के निजी सदस्य विधेयक ‘द प्रमोशन ऑफ नेचुरल एग्रीकल्चर बिल, 2025’ को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की इस अनुशंसा के बाद अब इस क्रांतिकारी बिल पर लोकसभा में चर्चा और बहस का रास्ता साफ हो गया है।
क्यों खास है यह मंजूरी?
आमतौर पर निजी विधेयक ठंडे बस्ते में चले जाते हैं, लेकिन इस बिल की गंभीरता को देखते हुए संविधान के ‘अनुच्छेद 117(3)’ के तहत राष्ट्रपति ने खुद इस पर लोकसभा में विचार करने की सिफारिश की है। इसकी आधिकारिक पुष्टि लोकसभा सचिवालय और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पत्रों के जरिए हुई है।
‘धरती की सेहत और किसान की जेब’ दोनों बचेगी
इस बड़ी सफलता पर सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी मांग है। रासायनिक खेती ने किसानों की लागत बढ़ा दी है और हमारी मिट्टी को बंजर बना दिया है। यह बिल किसानों को एक ऐसी व्यवस्था की ओर ले जाएगा जो कम लागत वाली, पर्यावरण के अनुकूल और लंबे समय तक टिकने वाली होगी। यह ‘बैक टू बेसिक्स’ (जड़ों की ओर लौटने) का आंदोलन है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप यह कदम किसानों की आय दोगुनी करने और देश को स्वस्थ खाद्यान्न देने में गेम-चेंजर साबित होगा।
इस बिल से क्या बदलेगा?
अगर यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो देश के कृषि परिदृश्य में ये 3 बड़े बदलाव आ सकते हैं।
जहर मुक्त और स्वस्थ खान-पान : इस पहल से आम जनता को शुद्ध और पौष्टिक अनाज मिलेगा, जिससे समाज में बढ़ती गंभीर बीमारियों पर लगाम लगेगी और एक ‘स्वस्थ भारत’ का निर्माण होगा।
एक नई शुरुआत
मध्य प्रदेश के एक सांसद की यह पहल अब पूरे देश के किसानों की तकदीर बदलने का जरिया बन सकती है। सांसद चौधरी ने इस मील के पत्थर को छूने के लिए राष्ट्रपति, पीएम मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया है। अब सबकी नजरें लोकसभा के आगामी सत्र पर हैं, जहां इस ‘हरित क्रांति 2.0Ó की नींव रखी जाएगी।
प्रधानमंत्री के विजन को मिलेगी मजबूती
सांसद श्री चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश पहले से ही प्राकृतिक और जैविक कृषि को बढ़ावा दे रहा है। यह विधेयक उस विजन को कानूनी मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने इस ऐतिहासिक शुरुआत के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।
खेती की लागत में भारी कमी : महंगे रसायनों और खाद की जगह प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गोबर और गौमूत्र) के उपयोग से किसान कर्ज के बोझ से मुक्त होंगे। शून्य लागत वाली यह पद्धति सीधे किसान की बचत बढ़ाएगी।
मिट्टी और पर्यावरण का संरक्षण : यूरिया और डीएपी जैसे रसायनों से बेजान होती जमीन को फिर से पुनर्जीवित किया जा सकेगा। इससे भूमि की गुणवत्ता सुधरेगी और आने वाली पीढिय़ों के लिए खेती योग्य जमीन बची रहेगी।












