इटारसी। शहर में बीते 24 घंटों के भीतर हुई सिलसिलेवार आपराधिक वारदातों ने आम नागरिकों को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहां बीती रात नाला मोहल्ला के पवन भदौरिया की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी गई, वहीं इस सनसनीखेज वारदात के चंद घंटों के भीतर ही गरीबी लाइन अंडरब्रिज और मालवीय गंज में चाकूबाजी की दो और दुस्साहसिक घटनाएं सामने आ गईं। एक ही दिन में तीन-तीन गंभीर वारदातों से जनता के बीच तीखा आक्रोश है और पिछले एक सप्ताह में हुई चाकूबाजी की करीब एक दर्जन घटनाओं से कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू यह भी है कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था सिर्फ ‘रिएक्टिव पुलिसिंग’ (घटना के बाद दौडऩे) में उलझ कर रह गई है? क्या पुलिस अफसरों को शहर की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से चुस्त करने और इन बेलगाम बदमाशों पर नकेल कसने के लिए एक सुनियोजित कार्ययोजना (योजनाबद्ध तरीके) पर काम करने का पर्याप्त समय और संसाधन मिल पा रहा है?
वारदात दर वारदात : एक ही दिन में लहूलुहान हुआ शहर
- पहला मामला (मर्डर) : सरकारी अस्पताल के सामने पुरानी रंजिश को लेकर दो युवकों ने ने पवन भदौरिया पर चाकू से जानलेवा हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो नामजद आरोपियों शुभम यादव उर्फ राजा और हसीब खान को हिरासत में ले लिया है।
- दूसरा मामला (मालवीय गंज) : अपनी मासूम बच्ची को टॉफी दिलाने निकले अर्जुन सिसौदिया ने जब दाल मिल के पास रहने वाले शिवा को लापरवाही से तेज गाड़ी चलाने पर टोका, तो आरोपी ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए।
- तीसरा मामला (अंडर ब्रिज): गरीबी लाइन अंडरब्रिज के पास से गुजर रहे राहगीर सुनील पर एक बदमाश ने बिना किसी वजह के सिर्फ अपना रौब दिखाने के लिए चाकू से हमला कर उसकी गर्दन और कान को जख्मी कर दिया।


सुलगते सवाल : क्या ‘पॉकेट-क्राइम’ को रोकने में नाकाम है खुफिया तंत्र?
शहर में सिलसिलेवार हो रही इन घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चाकूबाजों के पास हथियार कहां से आ रहे? : मामूली बात पर जेब से चाकू निकाल लेना यह साबित करता है कि युवा और छोटे-मोटे अपराधी पहले से ही हथियार लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं। पुलिस का चेकिंग अभियान लगातार क्यों नहीं चलता?
मुखबिर तंत्र और गश्त पर सवाल : शहर के संवेदनशील इलाकों में बीट प्रभारियों और पुलिस गश्त की क्या स्थिति है? विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा की बैठक के तुरंत बाद ऐसी वारदातें होना कानून के इकबाल को चुनौती है।
अधिकारियों को योजनाबद्ध काम करने के लिए वक्त और संसाधन की दरकार
इस आक्रोश के बीच जमीनी हकीकत यह भी है कि इटारसी जैसे बड़े और महत्वपूर्ण जंक्शन वाले शहर में पुलिस बल की भारी कमी है। कल ही विधायक की बैठक में यह बात आधिकारिक रूप से सामने आई थी कि शहर में स्वीकृत पदों की तुलना में पुलिस बल बेहद कम है। विशेषज्ञों और प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि जब पुलिस बल चौबीस घंटे सिर्फ एक घटना की जांच से उठकर दूसरी घटना के स्पॉट पर दौडऩे में व्यस्त रहेगा, तो वह अपराध नियंत्रण की कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाएगा। पुलिस कप्तानों और थाना प्रभारियों को शहर का ‘क्राइम मैप’ तैयार करने, हर वार्ड के असामाजिक तत्वों की सूची अपडेट करने, और आदतन अपराधियों पर ‘प्रतिबंधात्मक कार्रवाई’ (जैसे जिला बदर या रासुका) करने के लिए थोड़ा वक्त और शांतिपूर्ण माहौल मिलना जरूरी है। जब तक पुलिस को केवल तात्कालिक दबाव से हटाकर योजनाबद्ध तरीके से काम करने का मौका नहीं दिया जाएगा, तब तक अपराधियों के नेटवर्क को जड़ से नहीं उखाड़ा जा सकता।
नागरिकों की मांग : अब तसल्ली नहीं, सख्त एक्शन चाहिए
लगातार हो रही इन सरेराह वारदातों से नागरिकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। लोगों का कहना है कि वे शहर में खौफ के साए में नहीं जी सकते। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि वरिष्ठ अधिकारी इटारसी पुलिस को अतिरिक्त बल मुहैया कराएं ताकि पुलिस टीमें तात्कालिक जांच के साथ-साथ शहर में स्थायी सुरक्षा और नाइट गश्त का एक मजबूत खाका खींच सकें। जनता को अब पुलिस से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़कों पर दिखने वाला सख्त और खौफ पैदा करने वाला एक्शन चाहिए।










