इटारसी। मंगलवार की शाम पश्चिमी आकाश में सूर्यास्त के बाद आम लोगों और खगोल प्रेमियों को चांद का एक बेहद खूबसूरत और दुर्लभ नजारा देखने को मिला। अमूमन इस दौरान चंद्रमा का सिर्फ हंसियाकार (क्रिसेंट) हिस्सा ही चमकता हुआ दिखाई देता है, लेकिन इस बार एक विशेष खगोलीय घटना के कारण पूरा गोलाकार चंद्रमा हल्की चमक के साथ दिखाई दे रहा था।
खगोल विज्ञान के क्षेत्र में इस अनूठी घटना को ‘अर्थशाइन’ (Earthshine) कहा जाता है।
क्या है अर्थशाइन?
नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इस खगोलीय घटना की वैज्ञानिक वजह समझाते हुए बताया। पृथ्वी का परावर्तन : इस घटना के दौरान सूर्य की रोशनी सीधे चांद पर पड़ने के साथ-साथ, पृथ्वी की सतह जैसे बादलों और बर्फ से टकराकर परावर्तित (Reflect) हो रही थी। यही परावर्तित रोशनी चंद्रमा के अंधेरे (अप्रकाशित) भाग पर पड़ रही थी, जिससे उसका अंधकारमय हिस्सा भी हल्की चमक के साथ दिखाई देने लगा।
- दूरी: इस अद्भुत नजारे के समय चंद्रमा, पृथ्वी से लगभग 3 लाख 61 हजार 41 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। समय: टेलीस्कोप और नग्न आंखों से दिखने वाला यह मनमोहक नजारा रात के लगभग 9 बजकर 45 मिनट तक आसमान में बना रहा।
- मुख्य आकर्षण: ‘अर्थशाइन’ की इस घटना को आम बोलचाल में “नए चांद की बाहों में पुराना चांद” (The old moon in the new moon’s arms) भी कहा जाता है, जहां चमकदार पतली क्रीसेंट के बीच बाकी का पूरा हिस्सा धुंधला ही सही, लेकिन साफ नजर आता है। टेलीस्कोप से देखने पर यह नजारा और भी विहंगम प्रतीत हो रहा था।











