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अनंत चतुर्दशी : जाने गणेश विसर्जन का मुहूर्त   

अनंत चतुर्दशी : जाने गणेश विसर्जन का मुहूर्त   

इटारसी। रवि एवं सुकर्मा योग में अनंत चतुर्दशी व्रत पूजा के साथ गणेश विसर्जन चल समारोह का आयोजन कल 9 सितंबर को होगा। शुक्रदेव, वैभव लक्ष्मी, मां संतोषी का दिन शुक्रवार 9 सितंबर को है।

गुरू पं.रामजीवन दुबे (Guru Pt. Ramjivan Dubey) ने बताया कि अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन का मुहूर्त प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। अनंत चतुर्दशी व्रत का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। इस पर्व को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। अनंत चतुर्दशी का पर्व भगवान विष्णु का समर्पित किया गया है।

इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। साथ ही इसी दिन गणेश उत्सव का समापन भी होता है। इसी दिन शुभ समय में गणेश विसर्जन किया जाता है। गणपति बप्पा के भक्त इस मनोकामना के साथ उन्हें विदा करते हैं कि अगले बरस बप्पा फिर उनके घर पधारेंगे और जीवन में सुख और शांति लेकर आएंगे। देश भर में इस पर्व को बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस साल अनंत चतुर्दशी का त्योहार 9 सितंबर 2022, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर दिन गुरुवार को रात 09 बजकर 02 मिनट पर हो रही है। अगले दिन ये तिथि 09 सितंबर शुक्रवार को शाम 06 बजकर 07 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर इस साल अनंत चतुर्दशी 09 सितंबर को मनाई जाएगी। मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की पूजा के लिए 12 घंटे से अधिक का शुभ समय है।

इस दिन गणेश जी की पूजा का शुभ

मुहूर्त सुबह 06 बजकर 03 मिनट से शाम 06 बजकर 07 मिनट तक है। खास बात ये है कि इस साल अनंत चतुर्दशी के दिन रवि योग और सुकर्मा योग बने हुए हैं। पंचांग के अनुसार, इस दिन रवि योग -सुबह 06 बजकर 03 मिनट से शुरू होकर सुबह 11 बजकर 35 मिनट तक है। वहीं सुकर्मा योग सुबह से शुरू होकर शाम 06 बजकर 12 मिनट तक है।

भगवान विष्णु को प्रिय अनंत चतुर्दशी का व्रत

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि नौ सितंबर शुक्रवार को धनिष्ठा नक्षत्र व सुकर्मा योग में मनाया जाएगा। भगवान विष्णु की यह पूजा अनंत फलदायी मानी जाती है, दिनभर पूजा का शुभ योग है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ अनंत चतुर्दशी का व्रित रखेंगे। वहीं दूध-दही, पंचामृत आदि से निर्मित क्षीरसागर में मंथ भगवान विष्णु की विधिवत पूजा होगी।

ब्राह्मण व पंडितों से अनंत चतुर्दशी की कथा सुनने के बाद श्रद्धालु अनंत का धागा धारण कर करेंगे घरों में शुद्ध पकवान बनने के साथ भगवान की पूजा होगी। इसी दिन गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय अनुष्ठान का भी समापन होगा। नौ सितंबर को धनिष्ठा व शतभिषा नक्षत्र एवं सकुर्मा योग के संयोग में पूरे दिन पर्व को मनाया जाएगा।

इस दिन भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करना शुभ होता है। अनंत की 14 गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। कथा के अनुसार अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में 14 लोक तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुव: स्व:, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी. इन लोकों के पालन और रक्षा करने के लिए स्वयं भी 14 रूपों में प्रकट हुए थे।

हर गांठ में होती है भगवान के नाम की पूजा

अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला है। वहीं अनंत डोर की हर गांठ की भगवान विष्णु के नामों से पूजा की जाती है। पहले अनंत, फिर पुरुषोत्तम, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुंठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर एवं गोविंद की पूजा होती है। राशि के अनुसार करें अनंत धारण मेष, सिंह- लाल अनंत वृष, कर्क व तुला-चमकीला सफेद अनंत मिथुन, कन्या- हरा अनंत वृश्चिक- गहरा लाल अनंत धनु, मीन- पीला अनंत मकर, कुंभ- नीला अनंत धारण करें।

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