अक्षय तृतीया : 50 साल बाद बना विशेष संयोग, जाने मुहूर्त

अक्षय तृतीया : 50 साल बाद बना विशेष संयोग, जाने मुहूर्त

भोपाल। वैशाख शुक्ल पक्ष अक्षय तृतीया मंगलवार 3 मई को रोहणी नक्षत्र, शोभन योग में भागवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में भगवान परशुराम प्रकोटत्सव मनाया जावेगा। भृगु श्रेष्ठ महार्षि जमदग्नि माता रेणुका की गोद में भगवान परशुराम ने जन्म लिया। मंगलवार होने के कारण श्री हनुमान मंदिरों में चोला चढाकर श्री हनुमान चालिसा एवं सुंदरकांड का पाठ होगा। विशाल चल समारोह निकाले जावेंगे। शादी का अबूझ मुहूर्त होने के कारण हजारों दुल्हें घोड़ों पर सवार होकर बारात निकालेंगे। अक्षय तृतीया एक अबूझ मुहूर्त है यानी इस तिथि पर कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। अक्षय तृतीया को अखातीज के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय का अर्थ होता है जिसका कभी भी क्षय न हो यानी कभी नाश न हो।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया शुभ कार्य, दान-पुण्य, स्नान,पूजा और तप करने से अक्षय फल की प्राप्ति होता है। अक्षय तृतीया पर सोने के आभूषण खरीदने के खास परंपरा होती है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन अगर व्यक्ति सोना खरीदे उसके जीवन में सदैव माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। अक्ष्य तृतिया सूर्य उदय से पूर्ण रात्रि रहेगी। सभी तिथियों में बैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को विशेष तिथि माना गया है। शास्त्रों में अक्षय तृतीया को विशेष अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस विशेष दिन पर शुभ कार्य करने, शुभ खरीदारी करने और दान करने की विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किया गया शुभ कार्य हमेशा सफल होता है।

50 वर्षों बाद ग्रहों का विशेष संयोग

इस बार अक्षय तृतीया का त्योहार रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग में मंगलवार को मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया पर दो प्रमुख ग्रह स्वराशि और दो ग्रह अपनी उच्च राशि में मौजूद रहेंगे। इस तरह का संयोग 50 वर्षों के बाद बना है।
03 मई को अक्षय तृतीया के दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि यानी वृषभ में मौजूद होंगे और सुख और वैभव प्रदाता ग्रह शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में होंगे। इसके अलावा शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में और सदैव शुभ फल देने वाले देवगुरु बृहस्पति स्वराशि मीन में विराजमान रहेंगे।
मां चामुंडा दरबार के पुजारी गुरूजी पंडित रामजीवन दुबे के अनुसार इन चार बड़े ग्रहों का अक्षय तृतीया के दिन अपने अनुकूल स्थिति में होने से अक्षय तृतीया का महत्व काफी बढ़ गया है। इस तरह का शुभ और मंगलकारी संयोग बनने से अक्षय तृतीया पर हजारों शादियां होंगी। शुभ खरीदारी करने और माता लक्ष्मी संग भगवान विष्णु की उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। हर साल अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती मनाई जाती है। अक्षय तृतीया का विष्णु धर्मसूत्र, भविष्य पुराण, मत्स्य पुराण और नारद पुराण में उल्लेख है। ब्रह्मा के पुत्र अक्षय का प्राकट्य दिवस रहता है। अक्षय तृतीया सूर्योदय से पूर्ण रात्री रहेगी।
इसी मौके पर गुफा मंदिर भोपाल में कलश यात्रा, भजन, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं संत अवधेशानंद द्वारा भगवान परशुराम की मूर्ति का अनावरण किया जावेगा। रात्री को कवि सम्मलेन का आयोजन होगा।

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