इटारसी। पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के चलते आज, 20 मार्च को एक विशेष खगोलीय घटना होने जा रही है। 6 महीने के लंबे अंतराल के बाद आज सूर्य ठीक पूर्व दिशा से उदित होकर ठीक पश्चिम दिशा में अस्त होगा। नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इस घटना के पीछे के वास्तविक विज्ञान को साझा करते हुए प्रचलित भ्रमों को दूर किया है।
क्या है मार्च इक्विनॉक्स?
सारिका घारू के अनुसार, भारतीय समयानुसार आज शाम 8 बजकर 16 मिनट पर मार्च इक्विनॉक्स की स्थिति बनेगी। इस दौरान सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक लंबवत होता है। पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.4 डिग्री झुकी हुई है, जिसके कारण वर्ष भर सूर्य की स्थिति उत्तर से दक्षिण की ओर बदलती महसूस होती है। आज वह क्षण है जब सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा को दक्षिण से उत्तर की ओर पार करता है, जिसे खगोलशास्त्री फस्र्ट पॉइंट ऑफ एरीज या गणनाओं के लिए जीरो पॉइंट भी कहते हैं।
भ्रम बनाम वास्तविकता, दिन-रात बराबर नहीं
अक्सर आम धारणा में इसे दिन-रात बराबर होने की घटना माना जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
- इक्वीलक्स : दिन और रात के वास्तव में बराबर होने की घटना को इक्वीलक्स कहा जाता है, जो इस वर्ष 5 दिन पहले यानी 15 मार्च को ही घटित हो चुकी है।
- इक्विनॉक्स : कल की घटना मुख्य रूप से सूर्य की दिशा से संबंधित है। साल में केवल दो दिन (मार्च और सितंबर) ही सूर्य बिल्कुल सटीक पूर्व से निकलकर सटीक पश्चिम में डूबता है।
प्रमुख शहरों में स्थिति (20 मार्च)
- नर्मदापुरम : सूर्योदय प्रात: 6:23, सूर्यास्त सायं 6:30 (दिन की अवधि : 12 घंटे 06 मिनट 37 सेकंड)
- भोपाल : सूर्योदय प्रात : 6:24, सूर्यास्त सायं 6:31 (दिन की अवधि : 12 घंटे 06 मिनट 39 सेकंड)
- उज्जैन : सूर्योदय प्रात: 6:31, सूर्यास्त सायं 6:37 (दिन की अवधि :12 घंटे 06 मिनट 39 सेकंड)
क्यों है यह खास?
सारिका ने बताया कि यह कुदरत का एक अनूठा संतुलन है जो 6 महीने के इंतजार के बाद दिखाई देता है। अब ऐसी ही स्थिति पुन: 23 सितंबर 2026 को बनेगी। यह दिन खगोल विज्ञान की गणनाओं और पृथ्वी के ऋतु परिवर्तन को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।










