‘अयोध्या 22 जनवरी’ पुस्तक नहीं, एक दस्तावेज है

‘अयोध्या 22 जनवरी’ पुस्तक नहीं, एक दस्तावेज है

भोपाल। आकाशवाणी (Akashvani) के समाचार संपादक संजीव शर्मा (Sanjeev Sharma) द्वारा लिखित पुस्तक अयोध्या 22 जनवरी को विद्वानों ने एक दस्तावेज बताया है। रीडर्स क्लब भोपाल (Readers Club Bhopal) के बैनर तले आज आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में संजीव शर्मा की पुस्तक अयोध्या 22 जनवरी (Ayodhya 22 January) पर पुस्तक चर्चा की गई। पुस्तक पर चर्चा में बुद्धिजीवियों का मानना था कि, यह पुस्तक भविष्य के लिए एक दस्तावेज है। इसको पढ़कर आने वाली पीढ़ी 22 जनवरी के प्रसंग को महसूस कर सकेगी।

कार्यक्रम के प्रारंभ में रीडर्स क्लब के संस्थापक सदस्य एवं लोक प्रकाशन के प्रमुख मनोज कुमार (Manoj Kumar) ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने क्लब की उपयोगिता, विशेषता एवं आगामी रणनीति पर प्रकाश डाला। संचार विशेषज्ञ एवं साहित्यकार संजय सक्सेना (Sanjay Saxena) ने संजीव शर्मा से साक्षात्कार रूप में पुस्तक की परिकल्पना एवं विषय वस्तु पर चर्चा की। चर्चा के दौरान संजीव शर्मा ने कहा कि ‘अयोध्या 22 जनवरी’ को लिखते समय मेरे जेहन में आने वाली पीढ़ी को इतिहास और भारत गौरव से अवगत कराना था। एक प्रश्न के जवाब में संजीव शर्मा ने कहा कि शीर्षक पाठकों को लंबे समय तक स्मरण में रहे, उसे ध्यान में रखकर इसमें अंकों का प्रयोग किया है। साथ ही 22 जनवरी भारत के इतिहास में एक ऐसी तारीख है जो स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

‘रीडर्स क्लब’ के इस आयोजन में नगर के सुपरिचित पत्रकार, लेखक एवं संचार कर्मियों का जमावड़ा रहा। पुस्तक की प्रस्तावना को पत्र सूचना कार्यालय अधिकारी अजय उपाध्याय (Ajay Upadhyay) ने प्रस्तुत किया। पुस्तक के अंश का पाठन पत्रकार शुरैई नियाजी (Shurai Niazi), जनसंपर्क अधिकारी रितेश दुबे (Ritesh Dubey), आकाशवाणी के समाचार वाचक राशिद अहमद खान (Rashid Ahmed Khan), कमेंटे्रटर प्रशांत सेंगर (Prashant Sengar) ने किया। इसके उपरांत पुस्तक पर विभिन्न बुद्धिजीवियों ने पुस्तक पर अपने विचार रखे। वरिष्ठ पत्रकार चंद्रहास शुक्ला ने पुस्तक को एक गंभीर दस्तावेज बताया। उनका मानना था कि पुस्तक मैं जिन पहलुओं को छुआ गया है, वह वास्तव में ज्ञानवर्धन करने वाले हैं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अजय बोकिल, सरमन नगेले, मौसम वैज्ञानिक गुरुदत्त मिश्रा, योग गुरु देवीदयाल भारती, सूचना प्रसारण अधिकारी समीर वर्मा उपस्थित थे। वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक पुष्पेन्द्र मिश्र ने आखिर में किताब पर अपनी बात रखी और इस किताब को आने वाली पीढ़ी के लिए दस्तावेज बताया। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार संजीव परसाई ने किया। अंत में आभार मनोज कुमार ने प्रस्तुत किया। प्रारंभ में सुप्रसिद्ध साहित्य का प्रोफेसर शरद पगारे को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। रीडर्स क्लब के सभी सदस्यों ने आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसके निरंतरता की बात कही।

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AUTHORRohit

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