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कानूनी अखाड़े में ‘बजरंग दल’ : 14 गौसेवकों की उम्रकैद के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगा संगठन

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सिवनी-मालवा। चार साल पुराने बहुचर्चित ‘कंटेनर कांड’ में 14 गौसेवकों को उम्रकैद की सजा क्या हुई, सिवनी-मालवा की सियासत और सामाजिक गलियारों में भूचाल आ गया है। इस अदालती फैसले के बाद अब ‘राष्ट्रीय बजरंग दल’ खुलकर मैदान में उतर आया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि वह अपने भाइयों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं रहने देगा। इस सजा के खिलाफ अब देश की बड़ी अदालत में कानूनी दंगल लड़ा जाएगा, जिसका पूरा खर्च और विधिक जिम्मा संगठन उठाएगा।

आंसू पोंछकर दिया न्याय का भरोसा

सोमवार की शाम सिवनी-मालवा की तिवारी धर्मशाला एक भावुक और बड़े संकल्प की गवाह बनी। यहां राष्ट्रीय बजरंग दल के दिग्गज पदाधिकारी सजा पाए सभी 14 लोगों के सहमे और परेशान परिजनों से मिलने पहुंचे। संगठन ने सांत्वना देने के बजाय सीधे हौसला दिया और कहा— अकेले मत समझना, पूरा संगठन आपके साथ खड़ा है। पदाधिकारियों ने साफ किया कि बहुत जल्द मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपील दायर कर सभी की जमानत कराने और उन्हें बाइज्जत बरी कराने के लिए देश के नामचीन वकीलों की फौज खड़ी की जाएगी।

धर्म की रक्षा करने वालों को अपराधी मान लेना मंजूर नहीं

प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रान्तीय मंत्री जगवीर सिंह का तेवर बेहद कड़ा था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा गौसेवक कोई पेशेवर अपराधी नहीं हैं। वे समाज और सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर निस्वार्थ भाव से निकलते हैं। 4 साल पहले जो कुछ भी हुआ, वह गौवंश को बचाने का एक प्रयास था। हमारा विधि प्रकोष्ठ अब इस पूरे मामले के अदालती फैसले का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। हाईकोर्ट में ऐसी पैरवी होगी कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

क्या था वो 2022 का कंटेनर कांड

पूरा मामला अगस्त 2022 का है, जब बाराखाड़ गांव के पास गौवंश से खचाखच भरे एक संदिग्ध कंटेनर को रोकने के दौरान भारी बवाल हुआ था। इस झड़प में ट्रक ड्राइवर शेख लाला नजीर अहमद की मौत हो गई थी। अदालत ने इस मामले को ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ द्वारा हत्या) की श्रेणी में रखते हुए 14 आरोपियों को सीधे आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुना दी।
राष्ट्रीय बजरंग दल ने इस पूरे मामले में अपना पक्ष बेहद आक्रामक तरीके से रखा है।

संगठन का साफ कहना है कि लड़कों ने कानून हाथ में नहीं लिया था, बल्कि वे तो पुलिस की मदद के लिए अवैध गौतस्करी को रोकने गए थे। संगठन ने सवाल उठाया कि असली गुनहगार तो वो गौतस्कर हैं जो मवेशियों को क्रूरता से भरकर ले जा रहे थे, उन पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती?

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की तैयारी : संगठन ने साफ कर दिया है कि गौरक्षा कानून के तहत गौसेवकों को जो अधिकार मिले हैं, उनकी रक्षा के लिए वे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की दहलीज खटखटाएंगे। वहीं, इस भारी संकट के बीच राष्ट्रीय बजरंग दल की इस एंट्री से रोते-बिलखते परिजनों के चेहरों पर न्याय की एक नई उम्मीद जरूर जागी है।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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