- मिलिन्द रोंघे

हमारे देश में गंजे व्यक्तियों के लिए भले ही कोई शासकीय रूप से सहायता न दी हो लेकिन दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे ली जे म्युंग की गंजे लोगों के संबध में की गई एक घोषणा ने उनके चाहने वालों की तादाद बढ़ा दी है और भारत में भी इस आशंका को जन्म दे दिया है कि कोई राजनैतिक दल तो गंजे लोगों के दुख, दर्द और पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ अनुभव कर उसके निराकरण के लिए प्रयास करेगा।
गंजेपन का दर्द सामान्य तौर युवाअवस्था में ज्यादा होता है। यही कारण है कि अनेक लोग गंजेपन को दूर करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं और इसे दूर करने के लिए सक्षम लोग इसके इलाज पर लाखों रुपए खर्च करते हैं। तो जो लोग सक्षम नहीं हैं, वे हालात से समझौता कर लेते हैं। कुछ कम्पनियां तो गंजेपन के इलाज के नाम पर महंगे तेल बेच कर करोड़ों का व्यापार कर रही हैं, परन्तु इससे कितने लोग लाभान्वित हुए हैं इसके किसी आकलन की जानकारी नहीं है। अनेक क्लीनिक तो बाल उगाने के नाम पर चल रहे हैं तो कुछ इलाज के बाद समय, पैसा, गंवाने के बाद भी बाल न आने पर उपभोक्ता फोरम और अदालतों का चक्कर लगा रहे हैं। इन बातों के बाद भी गंजेपन से पीडि़त लोग भी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हंै और तरह-तरह के उपचार करते हैं। बालों का असामान्य रूप से झडऩा एलोपेशिया कहलाता है। यह सिर पर या शरीर पर कहीं भी हो सकता है, यह अल्पकालिक या हमेशा के लिए हो सकता हैं ।
यद्यपि गंजेपन को कुछ भागों में विभक्त किया जा सकता है। किसी के सिर के आगे वाले भाग में बाल नहीं होते तो किसी के सिर के पीछे वाले भाग में, कोई सिर के मध्य भाग में गंजेपन से परेशान है तो कोई इस हालात में है कि उसके सिर में बाल हैं या नहीं, पता ही नहीं चलता लेकिन कान के आसपास बाल होने जिन्हें ‘कलम’ कहा जाता है, उनके तेजी से बढऩे से उसको कटिंग के लिए जाना पड़ता है। बाल कम होने के बावजूद केश कर्तनालय वाले उन्हें कोई छूट नहीं देते तो इसका उन्हें दुख होता है। अनेक लोगों ने गंजेपन से परेशान होकर विग लगवा ली तो कुछ ने हेयर ट्रांसप्लांट करवा लिया, कुछ ने अपने आप को पूरा गंजा कर लिया, सार्वजनिक रूप में रहते हुए इसे फैशन का रूप दिया है। उन्हें इस बात का कोई अफसोस नहीं कि वे गंजे हैं। लेकिन इस पर काफी खर्च भी आता है।
अनेक बार विभिन्न बीमारियों, अनुवांशिक कारण से, आयु बढऩे से, बालों को कस कर बांधने से (महिलाओं में), हार्मोन में बदलाव और तनाव के कारण भी गंजापन बढ़ जाता है। विशेषकर कैंसर में जब कीमोथेरेपी दी जाती है तो बाल झडऩे लगते ह़ै। लेकिन बाद में फिर आने भी लगते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ पुरुष ही गंजेपन से परेशान हों अनेक महिलाओं को भी दिक्कत है। ऐसे में उन्हें चोटी बनाने के लिए नकली बालों का सहारा लेना पडता है। तिरुपति सहित कुछ धर्म स्थलों पर बालों को चढ़ाने की परंपरा है। कहा तो जाता है कि इन चढ़ाये बालों के व्यापार से कुछ लोग लाखों कमाते हैं। कुछ समय पूर्व महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव तालुका के अनेक नागरिकों के बाल झडऩे लगे।
स्त्रोत फीचर्स की रिपोर्ट अनुसार बोंडगांव व खातखेड़ के पानी में नाइट्रेट व टीडीएस अधिक होने के कारण केवल 3 दिन में 51 व्यक्ति गंजे हो गये। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार बाल झडऩे का कारण फफूंद का संक्रमण भी हो सकता है। इसमें पहले खुजली फिर बालों का पतला होना और बाद में झडऩे लगते है। इसी रिपोर्ट के अनुसार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की टीम ने जांच में पाया कि गंजेपन की समस्या का कारण प्रभावित लोगों में सेलेनियम की मात्रा अधिक है जो राशन से वितरित होने वाले गेहूं में अधिक पाया गया है। गेहूं में सेलेनियम की मात्रा 0.1 से 1.9 मि.ग्राम/ प्रति कि. ग्राम होनी चाहिए जो 13.5 से 14.5 तक निकली ।
दक्षिण कोरिया में कुछ समय पूर्व हुए चुनावों में मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक समस्या, विदेश नीति, कोविड का उपचार में लापरवाही पर नहीं अपितु बाल झडऩे से रोकने के इलाज को सरकारी मदद से जोडऩे की घोषणा था। बालों का झडऩा रोकने के इलाज के लिए सरकारी मदद पर जोर देने से दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ली जे म्युंग को गंजे मतदाताओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
गंजे नागरिकों को दक्षिण कोरिया चुनाव के बाद आस बंधी है कि भारत में भी राजनैतिक दल इसके लिए मोर्चे या प्रकोष्ठ का गठन करेंगे ताकि गंजे व्यक्तियों को लाभान्वित कर उन्हें उनकी विचारधारा से जोड़ा जाए। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां गंजे व्यक्तियों ने अपना परचम नहीं लहराया हो। मोहन दास करमचंद गांधी, सरदार पटैल, विस्टन चर्चिल, लालकृष्ण आडवानी, क्रिकेटर सैय्यद किरमानी, फिल्म कलाकार डेविड, शेट्टी, राकेश रोशन, अनुपम खेर सहित सैकड़ों लोगों ने देश को गौरवान्वित किया है।
जनवरी 2022 के पहले सप्ताह में दक्षिण कोरिया के उदारवादी दल से ताल्लुक रखने वाले जे म्युंग द्वारा की गई घोषणा से मार्च में होने जा रहे राष्ट्रपति पद के चुनाव यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना, चर्चा में भी रहा लेकिन वे अन्य कारणों से चुनाव न जीत सके, वहां जीत कंजरवेटिव पार्टी के उम्मीदवार यून सुक इयोल की हुई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ली स्वयं गंजे नहीं हैं, लेकिन गंजों के लिए की गई इस घोषणा के बाद कोरिया के गंजों ने सोशल मीडिया में उनके समर्थन में प्रचार प्रारंभ कर दिया है। इससे उत्साहित होकर ली ने फेसबुक पर पोस्ट डाली की वे बाल फिर से उगाने के लिए बढिय़ा नीति लेकर आवेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बाल फिर से उगाने का उपचार राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम द्वारा कवर किया जाना चाहिए।
कुछ समय बाद देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव की घोषणा होना है, ऐसे उम्मीद की जाना चाहिए कि राजनैतिक दल गंजे (अल्पसंख्यक बालों वाले) नागरिकों के लिए कोई सुविधा अपने घोषणापत्र में शामिल करेंगे ।
मिलिन्द रोंघे
द ग्रेंड एवेन्यु कालोनी
इटारसी











