- बलराम जी के परिश्रम को आदर्श मानकर जीवन में आगे बढ़ें विद्यार्थी : डॉ. नीता राजपूत
सुखतवा। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में भगवान बलराम जयंती का आयोजन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने भगवान बलराम के जीवन, उनके परिश्रम और वर्तमान परिदृश्य में उनके आदर्शों की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या की देवी मां सरस्वती, भगवान बलराम और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण कर किया गया।
छात्रों को कराया विराट व्यक्तित्व से परिचित
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. सतीश ठाकरे ने विद्यार्थियों को भगवान बलराम के जन्म, शिक्षा, विवाह और उनके शेषनाग अवतार से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रदान की। वहीं, वक्ता डॉ. राधा आशीष पांडे ने भगवान बलराम और श्रीकृष्ण के आत्मीय संबंधों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम दुर्योधन और भीम दोनों के गुरु थे। उन्होंने विद्यार्थियों से भगवान बलराम के विविध आयामों और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
संस्कृति और जड़ों से जुडऩे का अवसर
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन हमें हमारी जड़ों, संस्कृति और महान परंपराओं से जोड़ते हैं। उन्होंने वर्तमान समय में भगवान बलराम के विचारों की प्रासंगिकता बताते हुए सतत विकास, न्यूनतम उपभोग, सीमित आवश्यकताओं और नैतिक मूल्यों पर जोर दिया। डॉ. राजपूत ने कहा कि आज के युग में बलराम जयंती मनाना इसलिए भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह हमें प्रकृति, कृषि, श्रम और भारतीय जीवन-मूल्यों के प्रति जागरूक करता है।
कार्यक्रम का संचालन रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राधा आशीष पांडे एवं श्रीमती संध्या उपाध्याय ने किया। प्रवीण कुशवाहा ने सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन में डॉ. हिमांशु चौरसिया, कामधेनु पटोदिया, जोसलिन कुजूर, दिशा ठाकुर, डॉ. महेंद्र चौधरी, आयुष सादराम, डॉ. डॉली पथौरिया सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।











