राष्ट्र की सफलता हेतु महात्माओं का अनुशासन आवश्यक

राष्ट्र की सफलता हेतु महात्माओं का अनुशासन आवश्यक

इटारसी। जिस राष्ट्र की सत्ता के संचालन में महात्माओं का अनुशासन होता है, वह राष्ट्र लोकप्रियता, शांति, सद्भाव एवं समृद्धि के साथ पूर्ण विकास की ओर अग्रसर होता है, उस राष्ट्र में रामराज (Ramraj)का आभास होता है।
उक्त उद्गार संत श्री महावीर दास ब्रह्मचारी (Saint Shri Mahavir Das Brahmachari) ने ग्राम सोनतलाई (Village Sontalai) में चेत्र नवरात्र पर आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ (Shri Shatchandi Mahayagya) एवं श्री राम कथा समारोह (Shri Ram Katha ceremony) के छठवें दिन व्यक्ति किये। उन्होंने कहा कि शासन भले ही किसी का हो अनुशासन महात्माओं का होना चाहिए। जैसे अयोध्या में शासन चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ (Raja Dasharath) का था, अनुशासन महात्मा गुरु वशिष्ठ का था। जनकपुर (Janakpur) में शासन महाराज जनक का था तो अनुशासन महात्मा सतानंद जी का था। जिसके चलते अयोध्या में मर्यादामयी श्री राम (Shri Ram) एवं जनकपुर में भक्ति की प्रतिमूर्ति माता सीता प्रकट हुई और दोनों ही राज्यों में रामराज संचालित हुआ। जहां रामराज होता है वहां के समस्त जीवों का जीवन सफल हो जाता है।
प्रसंग को विस्तार देते हुए राघवेंद्र रामायणी ने कहा कि जहां किसी का अनुशासन नहीं होता है, वहां की सत्ता अहंकारी हो जाती है, जो समाज को सुख नहीं दुख देती है। जैसे लंका में रावण का शासन रहा लेकिन अनुशासन किसी का नहीं था, जिसका खामियाजा लंका की जनता को भुगतना पड़ा। अंत में प्रभु श्रीराम नहीं लंका में रावण रूपी कुशासन को समाप्त कर वहां विभीषण जैसे महात्मा को शासन की बागडोर सौंपी। जब कहीं जाकर लंका में भी सुख शांति स्थापित हुई। वर्तमान में वहां कुशासन के चलते अकाल की स्थिति बनी हुई है। युवा आचार्य चेतन कृष्ण, सुश्री मानस सुमन एवं स्वर कोकिला शिरोमणि दुबे ने भी श्री राम राज्य की सुंदर व्याख्या की। आरंभ में राजीव दीवान एवं अन्य वरिष्ठों ने संत श्री महावीर दास एवं अन्य वक्ताओं का स्वागत सम्मान किया।



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AUTHORRohit

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