अमृत पीने वाले देव, विष पीने वाले महादेव कहलाये

अमृत पीने वाले देव, विष पीने वाले महादेव कहलाये

-रामकथा के द्वितीय दिवस पर शिव पार्वती प्रसंग की कथा सुनायी
इटारसी। दूसरों को दुख देने से बड़ा कोई पाप नहीं है और दूसरों का कल्याण करने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। भगवान शंकर जी (Lord Shankar ji) का एक नाम शिव है, जिसका अर्थ होता है कल्याण करना। भगवान शिव (Lord Shiva) ने सदैव सभी का कल्याण किया है। यहां तक कि देवताओं की रक्षा के लिए उनको अमृत पिलाया और स्वयं विष पी गए। इसलिए अमृत पीने वाले देव कहलाए, लेकिन विष पीने वाले महादेव कहलाए। उक्त उद्गार श्री द्वारिकधीश बड़ा मंदिर (Shri Dwarkadhish Bada Mandir) में आयोजित संगीतमय श्री रामकथा (Musical Shri Ram Katha) के द्वितीय दिवस पर मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना के बालसंत शाश्वत जी महाराज ने व्यक्त किये। द्वितीय दिवस की कथा में व्यास पीठ से बालसंत शाश्वत जी महाराज ने कहा कि मानव जाति के कल्याण के लिए हमें शिव जी के चरित्र का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने शंकर पार्वती विवाह प्रसंग की कथा को मधुर वाणी में भजनो के साथ सुनाया, जिससे उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उल्लेखनीय है कि श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर में श्री रामजन्म महोत्सव समिति (Shri Ram Janma Mahotsav Samiti) द्वारा निरंतर 59 वर्षों से हिंदू नव वर्ष और गुड़ी पड़वा के उपलक्ष्य में श्री रामजन्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को द्वारिकाधीश महिला मंडल (Dwarkadhish Mahila Mandal) से हेमा पुरोहित, ममता अग्रवाल, संध्या माहेश्वरी, नितिका जैन सहित अन्य महिलाओं ने महाराज का स्वागत किया। आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा, संरक्षक प्रमोद पगारे, अध्यक्ष सतीश अग्रवाल सांवरिया, कार्यकारी अध्यक्ष जसवीर सिंह छाबड़ा, सचिव पं अशोक शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने व्यास पीठ की पूजन आरती की। श्री राम जन्ममहोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने सभी धर्मप्रेमी जनता से कथा में शाम साढ़े 7 बजे उपस्थित होने का आग्रह किया है। रविवार को समाजसेवी जगदीश मालवीय के भाई घासीराम मालवीय के द्वारा कथा प्रसादी में सहयोग किया गया।



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AUTHORRohit

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