आलस्य तिरस्कार का कारण बन सकता है : सद्गुरु

आलस्य तिरस्कार का कारण बन सकता है : सद्गुरु

इटारसी। संत श्री रविशंकर जी महाराज रावतपुरा सरकार के इटारसी नगर में प्रवास के द्वितीय दिवस श्रद्धालु भक्तमंडल और नागरिक सांध्यकालीन प्रार्थना एवं सत्संग में सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर महाराज श्री ने अपने संदेश में मनुष्य को आलस्य से दूर रहने को कहा। सद्गुरु ने कहा कि आलस्य एक ऐसा अंधकार है कि आलसी व्यक्ति पड़ा-पड़ा सोचता रहता है कि मेरा काम कोई अन्य व्यक्ति कर दे और मेरी तरक्की करा दे। आलसी व्यक्ति अपने मातहतों के वश में रहते हैं। वे उचित-अनुचित देखे बिना बात सही मान लेते हैं। इससे उन्हें हानि उठानी पड़ती है। आलस्य ही मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा शत्रु है। सदगुरु भगवान कहते हैं कि आलस्य बिना कार्य किए और बिना संघर्ष किए ही हारने की निशानी है। जीत और आलस्य में छत्तीस का आकड़ा है। आपको जीत चाहिए तो आलस्य को त्यागना होगा। नहीं तो जीत आपको त्याग देगी। आलसी व्यक्ति किसी कार्य में रुचि प्रकट नहीं करते। आलसी व्यक्ति की छवि ऐसी बन जाती है। किसी क्षेत्र में माहरत रखते हैं तो उसे पूरी लगन और निष्ठा के साथ करें। थोड़ा सा आलस्य आपके कॅरियर या जीवन के तिरस्कार का कारण बन सकता है। इसलिए आलस्य का त्याग कर पूरे मनोयोग के साथ कार्य करें, कल्याण होगा।

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AUTHORRohit

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