महर्षि दयानंद आर्य गुरुकुल ने मनाया नवसंवत्सर पर्व

महर्षि दयानंद आर्य गुरुकुल ने मनाया नवसंवत्सर पर्व

– आर्य कन्या शाला में अग्निहोत्र हवन का आयोजन किया
– नवसंवत्सर और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश
इटारसी। महर्षि दयानंद सरस्वती आर्य गुरुकुल (Maharishi Dayanand Saraswati Arya Gurukul) के तत्वावधान में आज आर्य कन्या शाला सूरजगंज (Arya Kanya Shala Surajganj) में नवसंवत्सर (Navasamvatsar) पर्व पर अग्निहोत्र हवन (Agnihotra Havan) के साथ भारतीय नववर्ष की शुरुआत की गई। आचार्य सत्यप्रिय (Acharya Satyapriya) ने हवन संपन्न कराया। इस दौरान भक्तों को फलाहार वितरित किया। नवसंवत्सर होने की खुशी में उपस्थित आर्यजन ढोल की ताल पर जमकर झूमे और एकदूसरे को नवसंवत्सर की शुभकामनाएं दी गईं।


नवसंवत्सर के अवसर पर स्कूल परिसर में भगवा ध्वज लगाये गये थे। सुबह 10 बजे के बाद यहां अग्निहोत्र हवन किया। आश्रम से जुड़े लगभग आधा सैंकड़ा सदस्यों ने हवन में आहुतियां डालीं। इसके बाद सभी ने नवसंत्सर की एकदूसरे को बधाई देते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता कर रहे पत्रकार रोहित नागे ने कहा कि भारतीय संस्कृति का नयावर्ष पूजा-पाठ, भक्ति से प्रारंभ होता है। हम अपनी परंपराओं के साथ इसे पूरे होश-हवाश में मनाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पतझड़ के माध्यम से पुराने और खराब हो चुके पत्तों को त्यागकर प्रकृति की अमूल्य धरोहर वृक्ष नया परिवेश अपनाते हैं, हमें भी नये वर्ष में मन की मलिनता को त्यागकर आपसी सद्भाव और सद्कर्म अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।
मुख्य अतिथि अखिल दुबे ने कहा कि यह हमारी संस्कृति है, जो प्रकृति से जुड़ी और वेदों पर आधारित जीवन पद्धति वाली है। हमें भी मानवता को बचाना है, हमारी भारतीय संस्कृति को बचाना है, तो अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। अपनी संस्कृति को संवाकर स्वयं को बलवान और निर्भीक बनाना होगा, तभी हम हमारी संस्कृति पर आने वाले किसी भी खतरे से एकजुट होकर निबट सकते हैं। आचार्य सत्यप्रिय ने एक माला के फूलों को एकजुट रखने वाले धागे का उदाहरण देते हुए सभी से अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक बालकृष्ण मालवीय, मुख्य यजमान राम आशीष पांडेय, जुगलकिशोर शर्मा, किशोर सीरिया, अनिल तिवारी, अशोक तिवारी, अनुराग दीवान, चंद्रेश मालवीय, मनोज अग्रवाल, मनोज तिवारी, विनोद पांडेय, अनिल शुक्ला, मोहनलाल मालवीय, आशीष चौधरी, पंकज गुप्ता, धनराज खाड़े, अतुल शुक्ला, अरविन्द मालवीय, भागीरथ चौधरी सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।



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AUTHORRohit

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