ठंडी पुलिया के पास हुए पांच साल पुराने हत्याकांड में आजीवन कारावास

ठंडी पुलिया के पास हुए पांच साल पुराने हत्याकांड में आजीवन कारावास

इटारसी। कोर्ट (Court) ने करीब पांच वर्ष पूर्व ठंडी पुलिया (Thandi Pulia) के पास हुए हत्याकांड में आरोपियों को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। हत्या पूजा-पाठ को लेकर हुए विवाद में पत्थर से कुचलकर की गई थी। आज विशेष न्यायालय (Special Court) में निर्णय पारित किया गया जिसमें हत्या के आरोपी पवन वर्मा उर्फ पिल्लू को आजीवन कारावास व 500 रुपए का अर्थदंड से दंडित किया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक केशवसिंह चौहान (Additional Public Prosecutor Keshav Singh Chauhan) द्वारा की गई ।अपर लोक अभियोजक केशव सिंह चौहान ने बताया कि 31 अगस्त 2017 को फरियादी रिंकू उर्फ विशाल डागोरिया ने पुलिस को मोबाईल से सूचना दी कि वह अपने पुत्र तुषार निवासी नागपुर रात के 11:30 बजे ठंडी पुलिया इटारसी (Itarsi) के पास मानक उइके से पूजा पाठ कराने के लिये गए थे, उनका कामकाज नहीं चलने के कारण पूजा पाठ करा रहे थे। मानक उइके ने दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत की, तभी आरोपी पवन पिल्लू निवासी 12 बंगला इटारसी एवं अभियुक्त विशाल उर्फ विक्की आये और मानक से कहा कि तुम लोग यहां पूजा नहीं कर सकते। घटना के समय आरोपी नाबालिग था। विवाद होने पर दोनों आरोपी ने चाकू और पत्थरों से मानक पर हमला कर उसकी हत्या कर दी एवं घटनास्थल पर उपस्थित फरियादी तुषार के साथ भी पत्थर से मारपीट की। तुषार ने यहां से भागकर अपनी जान बचाई। आरोपियों ने तुषार का मोबाइल और पर्स भी लूट लिया था। फरियादी के पर्स में तीन हजार रुपए नगद रखे थे।
मामले में न्यायालय ने आज निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त पवन उर्फ पिल्लू को धारा 302 हत्या के मामले में आजीवन कारावास से दंडित किया और 500 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड नहीं देने की दशा में दो महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा दी गई। धारा 394 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया। प्रकरण में शामिल एक अन्य अभियुक्त विक्की उर्फ विशाल जो कि घटना के समय 18 वर्ष से कम होकर नाबालिग था जिसका प्रकरण आरक्षी केन्द्र इटारसी ने किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत जेजे बोर्ड (JJ Board) के समक्ष प्रस्तुत किया है। जिसके संबंध में विधिक कार्यवाही बाल न्यायालय द्वारा किया जाना है तथा प्रकरण विचाराधीन है।

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AUTHORRohit

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