अपडेट : सीएमएचओ 2 और लेखापाल 3 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार…जाने मामला

अपडेट : सीएमएचओ 2 और लेखापाल 3 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार…जाने मामला

लोकायुक्त की टीम ने की दोनों के खिलाफ कार्रवाई

दो हजार रुपए लेखापाल को 28 अप्रैल को दे चुके थे

इटारसी। नर्मदापुरम जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आज भोपाल से आयी लोकायुक्त की टीम ने महज 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इनमें 3 हजार की रकम लेखापाल भावना चौहान (Accountant Bhavna Chouhan) और 2 हजार की राशि सीएमएचओ डॉ. प्रदीप मोजिस (CMHO Dr. Pradeep Mojis) ने मांगी थी। कुल रिश्वत 16 हजार रुपए के भोजन के बिल के एवज में 7 हजार रुपए की मांगी थी। दो हजार रुपए लेखापाल को पूर्व में दिये जा चुके थे। लोकायुक्त को शिकायत भी सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 मदन मोहन वर्मा ने की थी।
बताया जाता है कि पिछले दिनों हुए एक प्रशिक्षण में प्रशिक्षणार्थियों को भोजन की व्यवस्था की गई थी। उस भोजन का कुल भुगतान 16 हजार रुपए था। इसका भुगतान तो किया जा चुका था। लेकिन, लेखापाल और सीएमएचओ ने इसके एवज में राशि की मांग की थी। इसकी शिकायत संबंधित ने लोकायुक्त को की थी। योजना अनुसार आज फरियादी मदन मोहन वर्मा रिश्वत की रकम लेकर दोनों के पास पहुंचा और लोकायुक्त के 11 सदस्यीय दल ने दोनों अधिकारियों को ट्रैप किया है।

यह है मामला

जिला मुख्यालय पर स्वास्थ्य विभाग के प्रशिक्षण व अन्य कार्यक्रम चलते हैं, जिनमें प्रशिक्षणार्थियों के अलावा परिवार कल्याण विभाग के अधिकारी भी आते हैं। उनके भोजन की व्यवस्था की जाती है। विगत करीब दस माह पूर्व हुए एक प्रशिक्षण में दिये भोजन का भुगतान 16 हजार रुपए का होना था। यह व्यवस्था सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 मदन मोहन वर्मा के माध्यम से की गई थी। जब भुगतान की बारी आयी तो लेखापाल और सीएमएचओ ने उनको बिना पैसे टरकाना शुरु कर दिया। कभी फाइल गुम हो जाती तो कभी बिल गुम जाते थे। किसी तरह से सात हजार की रिश्वत की बात पर बिल पास हुए। 28 अप्रैल को 2 हजार रुपए लेखापाल को दिये जा चुके थे, आज 3 हजार लेखापाल को और 2 हजार सीएमएचओ को दिये गये तो उनको लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप किया।

यह कहना है शिकायतकर्ता का

शिकायतकर्ता सीएमएचओ कार्यालय में बाबू मदन मोहन वर्मा का कहना है कि हमने कई बार दोनों अधिकारियों से भोजन का बिल जल्द पास करने को कहा, क्योंकि भोजन प्रदाता फर्म पैसों का तकादा उनसे ही कर रही थी। कई बार वे आकर बेइज्जती भी कर गये। हमारी हालत यह हो गयी थी कि हमने उस गली से गुजरना बंद कर दिया था, जहां उनकी दुकान थी। जब परेशान हुए तो हमें शिकायत करनी पड़ी। क्योंकि इससे पूर्व भी कई चीजों के लिए रिश्वत देनी पड़ी थी, इस बाद छोटी सी रकम के लिए इतना परेशान हुए तो शिकायत करना जरूरी हो गया था।

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