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तोड़ दी बंदिशें, मरोड़ दी रूढिय़ां : फाइटर जेट से लेकर बोर्ड रूम तक ‘पिंक पावर’ का परचम

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  • अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : सीमाओं को लांघकर शिखर पर पहुंचती आज की नारी
Itarsi's soil and New Year's resolutions: Now it's time to look ahead

मंजुराज ठाकुर, 9424482884

आज ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ है। यह दिन केवल एक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि उस अदम्य साहस और अटूट संकल्प का सम्मान है, जिसने सदियों पुरानी रूढिय़ों को ध्वस्त कर दिया है। आज की महिला केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, वह पाताल से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी काबिलियत का परचम लहरा रही है।

हर क्षेत्र में सशक्त दखल

एक समय था जब कुछ क्षेत्रों को ‘केवल पुरुषों के लिए’ आरक्षित माना जाता था। चाहे वह सेना में युद्ध की अग्रिम पंक्ति हो, भारी उद्योग हो या फिर जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान, महिलाओं ने अपनी मेधा से इन धारणाओं को गलत साबित कर दिया है।

  • रक्षा और सुरक्षा : आज भारतीय बेटियां फाइटर जेट उड़ा रही हैं और सीमाओं पर मुस्तैद हैं। ‘कॉम्बैट रोल’ में उनकी बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि साहस का कोई लिंग नहीं होता।
  • विज्ञान और तकनीक : इसरो के मंगलयान से लेकर चंद्रयान मिशन तक, महिला वैज्ञानिकों की नेतृत्व क्षमता ने दुनिया को अचंभित किया है। ‘रॉकेट वुमन’ के रूप में उनकी पहचान आज नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणा है।
  • कॉर्पोरेट और स्टार्टअप : दुनिया की दिग्गज कंपनियों की कमान संभालने से लेकर नए यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स खड़ा करने तक, महिलाएं आर्थिक जगत की धुरी बन चुकी हैं।

नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता

महिलाओं की काबिलियत केवल काम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक कुशल निर्णयकर्ता के रूप में उभरी हैं। घर के बजट से लेकर देश की अर्थव्यवस्था और नीति निर्धारण तक, उनकी संवेदनशीलता और दूरदर्शिता बेहतर परिणाम दे रही है। पंचायती राज से लेकर संसद तक, उनकी बढ़ती राजनीतिक भागीदारी समाज में एक संतुलित बदलाव ला रही है।

‘जब एक महिला सशक्त होती है, तो पूरा परिवार सशक्त होता है, और अंतत: राष्ट्र का कायाकल्प होता है।’

चुनौतियां और भविष्य की राह

हकीकत यह भी है कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। कार्यस्थल पर भेदभाव, सुरक्षा की चिंताएं और ‘ग्लास सीलिंग’ जैसी बाधाओं को पार करने के लिए महिलाओं ने दोगुनी मेहनत की है। आज की नारी ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें ‘विशेष छूट’ नहीं, बल्कि ‘समान अवसर’ चाहिए।

निष्कर्ष : आज की महिला स्वावलंबी है, जागरूक है और सबसे महत्वपूर्ण, वह अपनी काबिलियत पर विश्वास करना जानती है। वह अब पुरुषों के ‘बूते’ माने जाने वाले क्षेत्रों में महज एक हिस्सा नहीं है, बल्कि वह उन क्षेत्रों का नेतृत्व कर रही है। यह रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करती है कि 21 वीं सदी निश्चित रूप से ‘नारी शक्ति’ की सदी है।

Manju Thakur

मंजू ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार एवं Narmadanchal.com के संस्थापक-संपादक हैं। वे वर्ष 2004 से नर्मदांचल क्षेत्र और मध्य प्रदेश की स्थानीय, सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़ी खबरों का संपादन और प्रकाशन कर रही हैं। उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से संस्कृत में स्नातकोत्तर, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक तथा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। पत्रकारिता के साथ-साथ वे डिजिटल मीडिया, समाचार संपादन एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अनुभव रखती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुँचाना है।

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