Category: Bahurang

बहुरंग: इटारसी में महिला लेखन

Narmadanchal- 01/11/2021

विनोद कुशवाहा जब से साहित्यिक पत्रिका 'अनाहत' के " महिला लेखन अंक " के प्रकाशन की घोषणा हुई है तभी से हिंदी साहित्य जगत में ... Read More

बहुरंग: शहर में साहित्यिक सन्नाटा कभी नहीं रहा

Narmadanchal- 25/10/2021

विनोद कुशवाहा एक समय था जब कलमकार परिषद द्वारा पुरानी इटारसी में स्व चांदमल चांद की प्रेरणा से स्व बद्रीप्रसाद वर्मा तुलसी जयंती पर प्रतिवर्ष ... Read More

बहुरंग – जगत जननी माँ…

Narmadanchal- 17/10/2021

विनोद कुशवाहा नवरात्रि में जगत जननी माँ का स्मरण किया जा रहा था। उनकी पूजा, अर्चना, आराधना की जा रही थी। ऐसे में मुझे अपनी ... Read More

बहुरंग: तोल मोल के बोल

Narmadanchal- 10/10/2021

विनोद कुशवाहा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एन वी रमना ने छत्तीसगढ़ के निलंबित एडीजी गुरजिंदर की याचिका पर सुनवाई करते हुए (more…) Read More

बहुरंग: पत्रकार फोकट क्लास के नहीं हैं

Narmadanchal- 03/10/2021

और अंत में... इटारसी में खुले मेडिकल कॉलेज विनोद कुशवाहा इन दिनों देश की राजनीति में भूचाल आया हुआ है । खेल भी इससे अछूता ... Read More

बहुरंग : मेरे शहर का रंगमंच

Manjuraj Thakur- 26/09/2021

- विनोद कुशवाहा :   मेरे शहर इटारसी का रंगमंच बहुत समृद्ध रहा है । यहां न केवल नाटकों का प्रदर्शन किया गया बल्कि नुक्कड़ ... Read More

रंगमंचीय कार्यशाला: एक अभिनव प्रयोग

Narmadanchal- 20/09/2021

विनोद कुशवाहा इन दिनों इटारसी शहर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वाधान में स्थानीय संस्कार मंडपम में स्वाधीनता अमृत तथा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत् ... Read More

समीक्षा- गुलमोहर: ‘एक अव्यक्त लगाव’ स्वर्णलता छेनिया

Narmadanchal- 06/09/2021

विनोद कुशवाहा पिछले दिनों नर्मदांचल की प्रतिभाशाली युवा कवयित्री स्वर्णलता छेनिया का कविता संग्रह ' गुलमोहर ' आंखों के सामने से गुजरा। नई कविताओं का ... Read More

‘ सी एम हेल्प लाइन ‘ जमीनी हकीकत कुछ और…

Manjuraj Thakur- 29/08/2021

- विनोद कुशवाहा : सी एम हेल्प लाइन को प्राप्त शिकायतों के समाधान में जिले को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है । इसमें इटारसी की ... Read More

कविता: जो माँ ने ‘रक्षा बंधन’ पर 71 वर्ष पूर्व लिखी

Narmadanchal- 22/08/2021

विनोद कुशवाहा ये कविता मेरी माँ ने 71 वर्ष पूर्व 27 अगस्त, 1950 को 'रक्षा बंधन' पर्व के अवसर पर लिखी थी। तब मेरी माँ ... Read More

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