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चुनाव संदर्भ : जय जय हनुमान गोसाई…

चुनाव संदर्भ : जय जय हनुमान गोसाई…

: राजधानी से पंकज पटेरिया –
चुनावी फिजा अभी धुंधलका है। तीन दिन अविराम मंथन के बाद भी मक्खन तह पर आया ही नहीं और भाजपा सूबे के १६ महापौर पद के नामों के लिए मंथन
पूरा नहीं हो पाया? मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली मे केंद्रीय मंत्री अमित शाह सहित अन्य मंत्रियों से मिलकर सीधे भोपाल भाजपा कार्यालय पहुंचे। यहां प्रदेश अध्यक्ष पंडित विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश भाजपा प्रभारी पी मुरलीधर राव, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के साथ बैठक की। देर रात तक मंथन मथनी अविराम चली,लेकिन नतीजा नदारत रहा। लोग उम्मीद की पिघलती शमा के साथ डूबते उतरते रहे, कि एक सूची की घोषणा हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका?
भोपाल के मामले मे प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मंत्री विश्वास सारंग, विधायक कृष्णा गौर, रामेश्वर शर्मा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में गहन विचार विमर्श हुआ लेकिन फिर भी बात नहीं बनी। इसके बावजूद आशा का इंद्रधनुष राजधानी में छमछम बरसात के बाद आसमान में उतरा था की अब और नहीं बस।
आज किसी भी सूरत में भोपाल सहित अन्य जगहो के महापौर के लिए नामों की घोषणा मंगलवार को हो ही जाएगी। देखिए सब्र का फल मीठा तो होता है और थोड़ा सा इंतजार सही। हनुमान जी की चरण शरण में शीश झुकाए, जय जय हनुमान गोसाई, कृपा करो गुरुदेव की नाई, अभिराम गुहार लगाएं हैं।

बगावती बादल की गड़गड़ाहट

इधर दोनों बाडे से आरोप-प्रत्यारोप की गोटमार के बाद, बगावत के बादल भी गड़गड़ाने लगे हैं। वहां यह चेतावनी भरा एलान ब्राह्मण समाज की ओर से किया गया है। ब्राह्मण समाज की उपेक्षा की गई तो इस्तीफा देकर जिला उपाध्यक्ष नवीन भट्ट निर्दलीय समर में कूद जाएंगे। उधर पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में आदिवासी समाज के विक्रम आह को खड़ा किया गया है। लिहाजा पार्टी के भीतर ही आदिवासी नेता लामबंद होकर बालाराम जी को निर्दलीय लड़ाने के लिए घोषणा कर चुके हैं।

अन्य समाज ने भी शंख बजाया

लोकतंत्र में सब को अपनी बात रखने का हक है। लिहाजा दोनो प्रमुख पार्टी में विभिन्न समाजों के लोगों ने अपने लोगों को प्रतिनिधि बनाने की पुरजोर मांग की है। भाजापा या कांग्रेस, यादव समाज, महाराष्ट्रीयन समाज सहित कुछ और वर्ग से मांग मजीरे की संवेद ध्वनि सुनाई दे रही है। नजर नवाज नजारा बदल न जाए कहीं? फिर दुष्यंत जी याद आ जाते। भैया जी लोगों की बड़ी मुसीबत है। सिर में सीने में कभी पेट में पांव में कभी एक जगह हो तो कहे दर्द इधर होता है। सब की चिंता है पर सीमाएं है।
खैर हम भी कल के सूर्य देव को अर्घ्य देते वक्त सुखद समाचार सुनने बेचैन है। तब तक हर हर नर्मदे हर गंगे।


पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
ज्योतिष सलाहकार
9340244352 ,9407505651

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