- भाव, राग, ताल और नाट्य का संगम, बच्चों को सिखाईं भरतनाट्यम की बेसिक मुद्राएं और नौ रस
इटारसी। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त जीनियस प्लैनेट स्कूल में भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु स्पिक मैके संस्था के तत्वावधान में भव्य भरतनाट्यम नृत्य कार्यशाला एवं प्रस्तुति का आयोजन किया। कार्यक्रम में पुणे से पधारीं सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना वैष्णवी धोरे ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से विद्यार्थियों और अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात स्कूल संचालक जाफर सिद्दीकी व मनीता सिद्दीकी तथा प्राचार्या ममता छिकारा ने उपस्थित कलाकार वैष्णवी दोहरे एवं अतिथि हेमंत कुमार शुक्ला का आत्मीय स्वागत किया।
भ-रा-त-नाट्यम का खूबसूरत पाठ, कला और शिक्षा का संगम
प्रस्तुति के दौरान नृत्यांगना वैष्णवी दोहरे ने बेहद सरल और रोचक अंदाज में विद्यार्थियों को भरतनाट्यम शब्द का अर्थ और इसकी बारीकियां समझाईं।
- भ (भाव) : राष्ट्रकवि दिनकर की कविता के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति को स्पष्ट किया गया।
- रा (राग) : राग की अवधारणा समझाने के लिए स्कूल की संगीत शिक्षिका पूजा राजपूत ने सरस्वती वंदना का गायन किया, जिस पर वैष्णवी धोरे ने भावपूर्ण नृत्य अभिनय प्रस्तुत किया।
- त (ताल) : ताल के गणित को समझाने के लिए नृत्यांगना ने प्रसिद्ध तोड़े, रिदम और 12 के पहाड़े के माध्यम से बच्चों को लयबद्धता का पाठ पढ़ाया।
- नाट्यम (नृत्य) : शास्त्रीय नृत्य के व्यावहारिक ज्ञान हेतु बच्चों को भरतनाट्यम की बुनियादी मुद्राएं— अर्वमंडी और मुरुमंडी सिखाई गईं।
इसके अलावा, नृत्यांगना ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य के विभिन्न प्रकारों, नौ रसों (नवरस) और मोर के नृत्य के हाव-भाव व चाल-ढाल को जीवंत रूप से मंच पर उतारा। अंत में तराना पर दी गई प्रस्तुति पर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
स्कूली बच्चों के साथ ढोलक-तबले पर जुगलबंदी
संपूर्ण आयोजन का सबसे खास और अद्भुत आकर्षण वह क्षण रहा जब नृत्यांगना वैष्णवीने जीनियस प्लैनेट स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा तबले और ढोलक पर बजाई जा रही रिदम (ताल) पर तत्काल जुगलबंदी करते हुए अपना नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों की संगत और कलाकार के तालमेल ने सभी की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम के दौरान स्पिक मैके के समन्वयक सुनील बाजपेयी ने नृत्यांगना वैष्णवी दोहरे का जीवन परिचय दिया तथा युवाओं के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं संस्कृति को जीवित रखने के स्पिक मैके के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस सांस्कृतिक संध्या एवं कार्यशाला के अवसर पर शासकीय कन्या शाला सूरजगंज के प्रधान पाठक महेश रैकवार, विद्यालय का समस्त शिक्षक अमला एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।











