भोपाल। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, पिछले 2 दिनों में वर्षा की गतिविधियों, बादलों और सापेक्ष आर्द्रता में भारी कमी आई है। निचले क्षोभमंडलीय स्तरों पर उत्तर गुजरात और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर एक प्रतिचक्रवातीय परिसंचरण बन गया है, जिसके प्रभाव से इस पूरे क्षेत्र में शुष्क उत्तरी हवाएं चलने लगी हैं। इसके परिणामस्वरूप, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर भारत के शेष भागों, संपूर्ण गुजरात और मध्य प्रदेश के साथ-साथ बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से पूरी तरह से वापसी कर ली है।
मध्य प्रदेश के सभी संभागों जिनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के सभी जिले शामिल हैं—में मौसम पूर्णत: शुष्क हो गया है तथा मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की है। राजधानी भोपाल में भी मौसम साफ रहने, 6-8 किमी/घंटा की गति से हवा चलने और अधिकतम व न्यूनतम तापमान क्रमश: 35 डिग्री और 18 डिग्री रहने का पूर्वानुमान है।
प्रदेश में शुष्क मौसम के साथ दिन और रात के तापमान में स्पष्ट अंतर देखने को मिल रहा है। प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 37.0 डिग्री धार में दर्ज किया, जिसके बाद तालुन (बड़वानी) में 36.6 डिग्री, ग्वालियर में 36.5 डिग्री, बैरसिया (भोपाल) में 36.3 डिग्री और रतलाम में 36.2 डिग्री तापमान रहा। इसके विपरीत, प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 17.0 डिग्री गिरवर (शाजापुर)/ इंदौर में दर्ज किया गया। रात में ठंडक का अहसास अन्य शहरों में भी हुआ, जिनमें छिंदवाड़ा (17.4 डिग्री), बैतूल (17.5डिग्री), पचमढ़ी (17.8डिग्री) और भोपाल (18.0डिग्री) शामिल हैं। वहीं, दिन के समय सबसे कम अधिकतम तापमान शिवपुरी और पचमढ़ी में 29.0 डिग्री, अमरकंटक में 29.1 डिग्री और मलाजखंड में 30.5 डिग्री दर्ज किया गया। दूसरी ओर, सबसे अधिक न्यूनतम तापमान टीकमगढ़ में 24.2 डिग्री और ग्वालियर में 22.8 डिग्री रहा।
इस मौसमी बदलाव को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनमानस और किसानों के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से लोगों को दिन के समय धूप से बचने के लिए छाते, टोपी व सनस्क्रीन का उपयोग करने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। सुबह-शाम की हल्की ठंड से बचने के लिए हल्की चादर या जैकेट पास रखने, और मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट या मच्छरदानी का उपयोग करने को कहा गया है। हृदय रोगियों को भी बदलते मौसम में अपना रक्तचाप नियमित जांचने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी में कहा गया है कि वे खाली खेतों में लहसुन, अगेती मटर, आलू और प्याज की बुआई की तैयारी शुरू कर दें और तापमान को देखते हुए तोरिया व सरसों की बुआई भी करें। बुआई से पहले खेतों में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने, लंबे व कमजोर तने वाले पौधों को हवा से गिरने से बचाने के लिए उचित मिट्टी चढ़ाने व सहारा देने, और पक चुकी फसलों व सब्जियों की तुरंत कटाई-तुड़ाई करने के निर्देश दिए गए हैं।










