इटारसी। स्वास्थ्य विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली और डॉक्टरों द्वारा समय पर कागजी कार्रवाई पूरी न करने का एक हृदय विदारक परिणाम सामने आया है। अंगदान की प्रक्रिया के लिए सरकारी अनुमति मिलने में हुई अत्यंत देरी के कारण एक मरीज निलेश राठी की इलाज के अभाव में मृत्यु हो गई। अब पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय और राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
अगस्त 2025 में निलेश राठी को पेट से जुड़ी गंभीर समस्या शुरू हुई थी। हैदराबाद के लिए किम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर सचिन डागा ने परीक्षण के बाद बताया कि नीलेश का लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है लेकिन परिवार ने प्रक्रिया में बाधाये और लापरवाही के आरोप लगाते हुए बताया कि दस्तावेज के अनुसार परिवार ने अंगदान के लिए हर संभव प्रयास किया। निलेश के बेटे हार्दिक और पत्नी डॉक्टर सोनाली ने लीवर दान करने की पेशकश की। लेकिन जांच में उन्हें अनफिट घोषित कर दिया गया। अंत में निलेश के भतीजे विनायक राठी ने अपना लीवर देने का साहसिक निर्णय लिया। परिवार का आरोप है कि 25 फरवरी 2026 को जब से वह अनुमति के लिए तेलंगाना के डीमई ऑफिस पहुंचे तो अधिकारियों का व्यवहार अत्यंत संवेदनशील था। बीमार मरीज को घंटो पेड़ के नीचे इंतजार कराया और कार्यालय में बैठने तक की व्यवस्था नहीं दी गई अस्पताल के कोआर्डिनेटर योगेश और डॉक्टर सचिन डागा पर आरोप लगाया कि उन्होंने कथित तौर पर वेटिंग लिस्ट और फाइल को आगे बढ़ाने में टालमटोल की।
22 फरवरी तक डॉक्टर केवल आश्वासन देते रहे कि कल सब ठीक हो जाएगा लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी लगातार होती देर के कारण निलेश की स्थिति बिगड़ती गई 21 फरवरी 2026 को गंभीर स्थिति में इटारसी और फिर नागपुर के विवेक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया और अंततः 24 फरवरी 2026 की रात को नीलेश ने अंतिम सांस ली। मृतक की मां मीना राठी, भाई नितेश राठी और पत्नी डॉक्टर सोनाली राठी ने इस पूरी घटना के लिए डॉक्टर सचिन डागा, कोऑर्डिनेटर योगेश और डीमई तेलंगाना के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। परिवार का कहना है कि यदि समय पर अनुमति मिल जाती तो निलेश आज जीवित होते।
परिवार ने अपनी शिकायत की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया नई दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन स्वास्थ्य मंत्री तेलंगाना शासन को भेज कर मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा ना सहनी पड़े










