सिवनी मालवा।अमृत भारत योजना में शामिल सिवनी मालवा के बानापुरा रेलवे स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और नई ट्रेनों के ठहराव की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार को पत्रकार संघ ने सर्वसमाज और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर तहसीलदार नितिन कुमार झोड़ और स्टेशन प्रबंधक सियाराम सिंह को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प.म.रे के महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपा।
पत्रकार संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर व्यास और नपाध्यक्ष नितेश जैन ने बताया कि पिछले 35 वर्षों से बानापुरा में किसी नई ट्रेन का ठहराव नहीं हुआ है। रेलवे को यहां से करोड़ों की आय होने के बावजूद जनता की मूलभूत सुविधाओं और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
प्रमुख मांगें: इन ट्रेनों का हो ठहराव
इंटरसिटी की मांग: कोरोना काल में बंद हुई भुसावल-नागपुर (दादा धाम इंटरसिटी) को पुनः शुरू किया जाए, जिससे मरीजों और आमजनों को सस्ती यात्रा का लाभ मिले। साथ ही भुसावल-खंडवा-भोपाल नई इंटरसिटी एक्सप्रेस चलाई जाए।
एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव: पुष्पक एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस, बनारस-हड़पसर (अमृत भारत), अहमदाबाद-सहरसा, जयपुर-हैदराबाद, हावड़ा-मुंबई मेल सहित अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव बानापुरा में सुनिश्चित किया जाए।
समय में बदलाव: वर्तमान में रुकने वाली काशी और झेलम एक्सप्रेस देर रात आती हैं, जिससे यात्रियों को लाभ नहीं मिलता। इनके समय में सुधार किया जाए।स्टेशन पर इन व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत
प्लेटफॉर्म का विस्तार: वर्तमान प्लेटफॉर्म केवल 18 डिब्बों का है, जबकि ट्रेनें 22 से 24 डिब्बों की आ रही हैं। 5-6 डिब्बे पटरी पर रहने से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को भारी परेशानी होती है।
गुड्स रेक पॉइंट हटे: स्टेशन से प्रतिवर्ष लगभग 150 रेक माल लोड होता है, जिससे रेलवे को 60-70 करोड़ की आय होती है। लेकिन साल में 300 दिन भारी वाहनों के आवागमन के कारण शहर में धूल, ट्रैफिक और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इस पॉइंट को अन्यत्र शिफ्ट किया जाए।
अन्य सुविधाएं: बुजुर्गों को रेल किराये में मिलने वाली छूट पुनः बहाल की जाए और स्टेशन पर जी.आर.पी. चौकी की फिर से स्थापना हो।
मांगें नहीं मानी तो होगा चरणबद्ध आंदोलन
नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो शासन-प्रशासन के खिलाफ उग्र और चरणबद्ध संवैधानिक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रथम चरण: हस्ताक्षर और पोस्टकार्ड अभियान चलाकर रेल मंत्री व अधिकारियों का ध्यानाकर्षण।
द्वितीय चरण: 02 अक्टूबर (गांधी जयंती) पर प्रतिमा के सामने मौन धरना।
तृतीय चरण: काली पट्टी बांधकर युवाओं व छात्रों के साथ सिवनी मालवा से बानापुरा तक पैदल मार्च और जयस्तंभ चौक तक मशाल/कैंडल मार्च।
अंतिम चरण: संपूर्ण नगर बंद और ‘रेल रोको’ आंदोलन।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पत्रकार राजू राठौर, रामशंकर शर्मा, उमेश गौड़, नकुल मालवीय, सुधीर मालवीय, मनमोहन राठौर, नपाध्यक्ष नितेश जैन, पार्षद ईश्वरदास जमीदार, दीपक बाथव, दीपक दीक्षित, दुर्गेश उइके, देवी कुशवाह, कमलेश लौवंशी, अधिवक्ता सुशील खत्री, विकास पाठक, शेखर पुरोहित, विहिप से शिव राठौर, शिवसेना से विष्णु गहलोत, पूर्व एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पृथ्वी सिंह रघुवंशी, देवेंद्र रघुवंशी, पेंशनर्स संघ अध्यक्ष हरिशंकर गौर, नर्मदा प्रसाद रघुवंशी, किसान संघ से जगदीश पाटिल, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष स्वदेश शर्मा, संतोष शास्त्री, राजेंद्र ताम्रकार, राजेंद्र कोठारी, जामा मस्जिद सदर साजिद कुरैशी, फिरोज खान, ऑटो संघ से बादल खान और आशिक कुरैशी सहित सैकड़ों की संख्या में व्यापारी और आम नागरिक मौजूद थे।











