dhanateras pradosh vrat

499 वर्ष बाद धनतेरस प्रदोष व्रत पर ग्रह-योगों का दुर्लभ संयोग

त्रिपुष्कर, अमृत योग में शुभारंभ, लाभ देगा

1521 धनतेरस के ग्रह योग 2021 में

बाजारों में होगी धन वर्षा, करोड़ों का होगा कारोबार

इटारसी। मां चामुंडा दरबार भोपाल के पुजारी गुरु पंडित रामजीवन दुबे ने बताया की कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत धनतेरस भगवान धनवंतरी जयंती मंगलवार 2 नवंबर को मनाई जाएगी। यम दीप दान रात्रि 07:30 से 09:00 बजे लाभ में होगा।

चौघडिय़ानुसार पूजा, क्रय-विक्रय मांगलिक कार्य का शुभ समय
सुबह 09: 00 से 10: 30 चर
सुबह 10: 30 से 12:00 लाभ
दोपहर 12:00 से 01: 30 अमृत
दिन 03:00 से 04: 30 शुभ
रात्री 07: 30 से 09:00 लाभ
रात्री 10:30 से 12:00 शुभ

स्थिर लग्न शुभ समय
सुबह 07: 30 से 09: 47 वृश्चिक
दिन 01: 39 से 03: 12 कुंभ
शाम 06: 23 से 08: 22 वृृष

प्रदोषकाल, गौधूली
शाम : 5:39 से 8:14 तक सर्वश्रेष्ठ समय

भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता रहा है। यह कहावत आज भी प्रचलित है कि पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया इसलिए दीपावली (Deepawali) में सबसे पहले धनतेरस को महत्व दिया जाता है। जो भारतीय संस्कृति के हिसाब से बिल्कुल अनुकूल है। शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। मान्यता है कि भगवान धनवंतरी (Dhanwantari) के अंशावतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धन्वंतरि का अवतार लिया था। भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।

धनतेरस की पौराणिक एवं प्रामाणिक कथा
धनतेरस से जुड़ी कथा है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (Kartik Krishna Trayodashi) के दिन देवताओं के कार्य में बाधा डालने के कारण भगवान विष्णु ने असुरों के गुरु शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार, देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गए। शुक्राचार्य ने वामन रूप में भी भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे उन्हें इंकार कर देना। वामन साक्षात भगवान विष्णु हैं, जो देवताओं की सहायता के लिए तुमसे सब कुछ छीनने आए हैं। बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं मानी। वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि, दान करने के लिए कमंडल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पग से अंतरिक्ष को। तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं होने पर बलि ने अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठा। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुना धन-संपत्ति देवताओं को मिल गई। इस उपलक्ष्य में भी धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।
धनतेरस के दिन सोना-चांदी, गाड़ी, इलेक्ट्रानिक आइटम्स आदि खरीदे जाते हैं। इसके अलावा धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदकर इसकी पूजा करने से गरीबी खत्म होती है और घर में अपार सुख-समृद्धि आती है. इस दिन बर्तन खरीदने की भी परंपरा है।

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