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दीवाली : भीतर के प्रकाश को जगाने का प्रेरणादायक संदेश

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  • रोहित नागे, इटारसी
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दीपावली, यानी ‘दीपों की पंक्ति’ – यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का वह गौरवशाली उत्सव है, जो हमें अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की जीत और अज्ञान पर ज्ञान के उजाले का शाश्वत संदेश देता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, और इसका महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के गहरे सत्य से जोड़ता है।

दीवाली का पौराणिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ

दीपावली कई संदर्भों से जुड़ी हुई है, जिनमें मुख्य हैं,
  • राम की अयोध्या वापसी : सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार, यह वह दिन है जब भगवान राम 14 वर्ष के वनवास और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में घी के दीये जलाए थे, जिससे अमावस्या की वह रात भी पूर्णिमा-सी जगमगा उठी थी। यह घटना हमें सत्य, धर्म और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, भले ही मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो।
  • देवी लक्ष्मी का प्रकटीकरण : धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दीपावली के दिन ही धन और समृद्धि की देवी, मां लक्ष्मी, क्षीरसागर के मंथन से प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा कर हम न केवल भौतिक समृद्धि (धन), बल्कि आंतरिक समृद्धि (सद्गुण) की भी कामना करते हैं।
  • ज्ञान और बुद्धिमत्ता : जैन धर्म में, यह वह दिन है जब भगवान महावीर को निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ था। सिख धर्म में, इस दिन छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह जी, ग्वालियर किले से 52 राजाओं के साथ रिहा हुए थे। ये संदर्भ हमें आत्मज्ञान, मुक्ति और आंतरिक जागृति का संदेश देते हैं।

दीवाली का प्रेरणादायक संदेश दीवाली का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण संदेश हमारे भीतर के अंधकार को दूर करके प्रकाश को स्थापित करना है।

भीतर का दीया जलाओ (अज्ञान पर ज्ञान की विजय)

हम जो दीये जलाते हैं, वे केवल घर को रोशन नहीं करते। वे हमें याद दिलाते हैं कि हमारे भीतर भी अज्ञानता, नकारात्मकता, ईष्र्या और भय का अंधकार हो सकता है। दीवाली हमें प्रेरणा देती है कि हम ज्ञान (शिक्षा, विवेक) और सकारात्मकता का दीया जलाकर अपने मन के अंधेरे को दूर करें।

प्रेरणा : केवल बाहर के अंधकार को ही नहीं, खुद को भी रोशन बनाना सीखो। नए आरंभ का स्वागत (बुराई पर अच्छाई की जीत)

दीपावली से पहले हम अपने घरों की सफाई करते हैं, यह सफाई हमें भूतकाल की नकारात्मक यादों, बुरी आदतों और पुराने वैमनस्य को त्यागने का संकेत देती है। यह पर्व एक नए आरंभ का प्रतीक है, जहां हम क्षमा, प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन की नई शुरुआत करते हैं।

प्रेरणा : जिस प्रकार राम ने रावण का अंत किया, उसी प्रकार हमें भी अपने भीतर की बुराई (आलस्य, क्रोध, द्वेष) पर अच्छाई (परिश्रम, शांति, प्रेम) की विजय प्राप्त करनी चाहिए।

साझा करना और बांटना (सामाजिक सद्भाव)

मिठाइयां, उपहार और खुशियां बांटना दीवाली का अभिन्न अंग है। यह हमें दयालुता, कृतज्ञता और उदारता का पाठ सिखाता है। सच्ची दीवाली तब होती है, जब हम अपनी खुशियां उन लोगों के साथ बांटते हैं, जिन्हें उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। किसी ज़रूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना ही लक्ष्मी पूजन का सबसे सच्चा फल है।

प्रेरणा : खुशी वस्तुओं में नहीं, बल्कि उस प्रकाश में है जिसे हम दूसरों के साथ साझा करते हैं। पर्यावरण के प्रति जागरूकता (ग्रीन दीवाली) आधुनिक संदर्भ में, दीवाली हमें जिम्मेदारी का संदेश भी देती है। हमें ऐसी दीवाली मनानी चाहिए जो हमारे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

पटाखों का शोर और प्रदूषण

अस्थायी खुशी देते हैं, लेकिन ग्रीन दिवाली (प्रकृति-अनुकूल दीवाली) हमें स्थायी स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा का वरदान देती है।

प्रेरणा : सच्ची समृद्धि प्रकृति और स्वास्थ्य के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने में है। निष्कर्ष दीपावली का त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियां (अंधेरा) क्यों न हों, आशा की एक छोटी-सी किरण (दीया) भी उस अंधेरे को चीर सकती है।

आइए, इस दीवाली पर हम केवल घर के कोने ही नहीं, बल्कि अपने विचारों, कर्मों और रिश्तों को भी प्रेम, ज्ञान और करुणा के प्रकाश से जगमगाएं। शुभ दीपावली! यह ज्योति आपके जीवन में नई आशा, उपलब्धि और अनंत समृद्धि लाए।

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

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