- रोहित नागे, इटारसी
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दीवाली, जिसे दीपावली भी कहते हैं, केवल पटाखों की गूंज और मिठाइयों की मिठास तक सीमित नहीं है। यह पर्व जीवन के एक गहन दर्शन को अपने भीतर समेटे हुए है—यह है विराट तमस (विशाल अंधकार) के सामने नन्ही ज्योति (एक छोटे दीपक) के हार न मानने का संकल्प। संसार में फैली हुई निराशा, अज्ञानता, दु:ख और नकारात्मकता को यदि हम ‘तमस’ (अंधकार) मान लें, तो दीवाली उस तमस से लोहा लेने वाले ‘प्रकाश’ के उत्सव का नाम है। यह वह अद्वितीय क्षण है जब असंख्य नन्हे दीप एकजुट होकर अंधकार की विशालता को चुनौती देते हैं और उसे पराजित करते हैं।
दीवाली : एक दार्शनिक युद्ध
तमस विराट है। यह सिर्फ बाहरी अंधेरा नहीं, बल्कि मन का अंधकार, अन्याय का बोझ और समाज की बुराइयां हैं। इस विराट तमस के सामने, एक अकेला दीपक—एक अकेली आशा या प्रयास—बहुत छोटा लग सकता है। लेकिन दीवाली हमें सिखाती है कि महत्व आकार का नहीं, बल्कि संकल्प का होता है। जब हर घर की देहली पर, हर खिड़की और गलियारे में एक नन्ही ज्योति प्रज्वलित होती है, तो यह प्रतीकात्मक रूप से यह घोषणा करती है, ‘अंधकार कितना भी घना क्यों न हो, मैं मौजूद हूं, और मैं हार नहीं मानूंगा।’ यह हर व्यक्ति के भीतर की उस छोटी सी चिंगारी का उत्सव है, जो कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मकता, ज्ञान और नैतिकता को थामे रखती है।
असंख्य दीपों की शक्ति
सामूहिक प्रयास दीवाली की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सामूहिकता में निहित है। एक दीपक शायद थोड़ी देर जलकर बुझ जाए, लेकिन जब असंख्य दीप मिलकर तमस से लोहा लेते हैं, तो वे एक ऐसी रोशनी का पुंज बन जाते हैं जो सिर्फ एक घर को नहीं, बल्कि पूरे समाज और ब्रह्मांड को प्रकाशित कर देती है। यह हमें सिखाता है कि सामाजिक तमस (जैसे गरीबी, रूढि़वादिता या घृणा) का मुकाबला किसी एक महापुरुष या अकेले व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के छोटे-छोटे, लगातार प्रयासों से होता है। हर एक दीपक, ज्ञान की एक लौ है, हर एक दीपक, सद्भावना की एक उम्मीद है। जब ये सभी दीपक एक साथ जलते हैं, तो यह सामूहिक ऊर्जा एक अभेद्य प्रकाश-दुर्ग का निर्माण करती है।
नन्ही ज्योति का संदेश
दीवाली का नन्हा दीपक हमें तीन अमूल्य संदेश देता है-
- हार न मानना : हर दीपक हमें याद दिलाता है कि सबसे मुश्किल समय में भी उम्मीद की लौ को बुझने नहीं देना चाहिए।
- आत्म-त्याग : दीपक स्वयं जलता है (तेल और बाती का त्याग करता है) ताकि दूसरों को प्रकाश दे सके। यह हमें निस्वार्थ सेवा और त्याग की प्रेरणा देता है।
- ज्ञान ही प्रकाश है : राम के अयोध्या लौटने पर जलने वाले दीप केवल खुशी व्यक्त नहीं करते, वे ज्ञान की विजय को भी दर्शाते हैं—बुराई (रावण) पर अच्छाई (राम) की, और अज्ञान पर ज्ञान की जीत।
इस दीवाली, आइए हम सब मिलकर अपने-अपने जीवन और समाज में एक-एक नन्ही ज्योति बनें। आइए, असंख्य दीप बनकर एकजुट हों और संकल्प लें कि विराट तमस को अपने सामूहिक प्रकाश से हमेशा के लिए दूर भगा देंगे। दीवाली केवल प्रकाश का नहीं, बल्कि साहस, एकता और अटूट आशा का पर्व है।








