पुण्य स्मरण – दुष्यंत जी : वे सीने मे आग लेकर चलते थे

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*पंकज पटेरिया :
आज भी जिनकी की ग़ज़लें हर किसी की जुबान पर हैं, होंठ पर थिरकती हैं। देशभर में कवि शायर या की लीडर हो उनके शेरों को कोट करते हैं। इसके बाद अपना भाषण या अपनी कविता शायरी पेश करते हैं। ऐसे मशहूर और कीर्ति शेष शायर दुष्यंत कुमार जी ने राजधानी में आकर अपने फक्कड़पन और कबीराना मिजाज के चलते घोर हलाहल पिए, अपनी साफगोई और बिना किसी रोजी रोटी, छूटने की परवाह किए अथवा सुख सुविधा के आकर्षण में उलझने की जगह अपनी बात वजनदारी के साथ बिना लाग लपेट कहने में उन्हें ने कभी कोई गुरेज नहीं किया। भले पंचायत विभाग आकाशवाणी या अन्य जगह जहां वह सेवारत रहे हो, कोई अधिकारी या तात्कालिक कोई महामहिम नाराज हो गए हो। तात्कालिक सरकार ने भी उन पर बहुत जुर्म ढाये, लेकिन वे कभी झुके नहीं। टूटना उन्होंने बर्दाश्त किया, लेकिन दरबारी बनना कभी उन्होंने पसंद नहीं किया।
दिल खोलकर हिम्मत से दुरावस्था, पक्षपात और बदचलन सियासत पर अपने शेरो और गजल से हमले करने में पीछे नहीं रहे। भले नौकरी भी गई, पर उन्होंने लेखन की इमानदारी को शरणागत नहीं होने दिया। भोपाल में 67 में विद्यार्थी जीवन में स्वरचित काव्य प्रतियोगिता में जिला स्तर से चयन होकर मैं संभाग स्तर पर टीटी नगर मॉडल स्कूल में काव्य पाठ करने के लिए गया था। तभी दुष्यंत जी के पावन दर्शन मुझे हुए थे। निर्णायक मंडल में दुष्यंत जी, राजेंद्र अनुरागी जी और आकाशवाणी के हीरा सागर जी सदस्य थे। मैंने इस अवसर पर भारत के कर्णधार हमको अपना प्यार दो एक गीत प्रस्तुत किया था। मुझे पुरस्कार स्वरूप एक पीतल का फ्लावर पॉट प्रदान किया गया था। गीत की एक पंक्ति थी नन्हे इन हाथों में नन्ही तलवार दो।
कार्यक्रम के बाद दुष्यंत जी ने सर पर हाथ रख कर कहा था तलवार तो तुम्हें ईश्वर ने दी है, इसकी धार बनाए रखना और हिम्मत से आगे बढ़ते रहना। कवि की कलम उसकी तलवार होती है। वे फ्लावर पॉट मेरे अग्रज स्वर्गीय मनोहर पटेरिया मधुर के पूजा घर में आज भी रखा है। मैंने भी अपने घर में पूजन स्थान में उनका गजल संग्रह “दरख्तों के साए में” गीता रामायण की तरह सम्मान से संजो के रखा है।
उनकी स्मृति में साहित्यकार राजूरकर राज ने दुष्यंत संग्रहालय की स्थापना की है। जहां पहुंच बेशक एक तीर्थ दर्शन का अलौकिक सुख अनुभव होता है। इस संग्रहालय में दुष्यंत जी की उपयोग की गई पोशाक आदि अन्य साहित्य करीने से संग्रहित है। 1सितंबर उनकी स्मृति में राजधानी में आयोजित एक कार्यकर्म मे उन्हे शिद्दअत से याद किया। कलकारो ने उनकी गजले पेश की। इस अवसर पर मानसरोवर यूनिवर्सिटी के कुलपति अरुण पांडे मुख्य अतिथि के रूप में और उनके साथ दुष्यंत जी के पुत्र आलोक त्यागी भी उपस्थित थे। संग्रहालय में अन्य साहित्य मनीषियों की पुण्य स्मृतियां भी चित्र आदि उनकी पोशाखे पादुलिप्या आदि संरक्षित की गई। दुष्यंत संग्रहालय पहुंच कर एक तीर्थ दर्शन का अलौकिक अनुभव होता है। उनकी स्मृति में सादर प्रणाम।

नर्मदे हर


पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
सेक्टर सेक्टर 5, हाउस नंबर 55
ग्लोबल पार्क सिटी, कटारा हिल्स भोपाल
9340244352 ,9407505651

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