- खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने दूर की मौसम से जुड़ी बड़ी भ्रांति
इटारसी। 6 जुलाई को हमारा ग्रह पृथ्वी, सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपने पूरे साल के सबसे दूरस्थ बिंदु पर पहुंच जाएगा। खगोल विज्ञान में इस अद्भुत खगोलीय घटना को ‘एफेलियन’ कहा जाता है। नेशनल अवार्ड विनर खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इस संबंध में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भारतीय समयानुसार आज रात 11 बजे पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी सबसे अधिकतम होगी। इस विशेष खगोलीय अवसर पर उन्होंने आम जनता और बच्चों से इसे विज्ञान को समझने के एक अवसर के रूप में लेने की अपील की है।
रात 11 बजे होगी रिकॉर्ड 15.2 करोड़ किमी की दूरी
सारिका घारू ने बताया कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर घूमने की कक्षा पूरी तरह गोल न होकर थोड़ी अंडाकार (दीर्घवृत्ताकार) है। इस वजह से साल में एक बार पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब होती है और एक बार सबसे दूर। आज होने वाली इस खगोलीय घटना के समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी बढ़कर लगभग 15 करोड़ 20 लाख किलोमीटर (15.2 करोड़ किमी) हो जाएगी। इसके विपरीत, इस वर्ष 3 जनवरी को जब पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीक थी, जिसे पेरिहेलियन कहा जाता है, तब यह दूरी लगभग 14 करोड़ 70 लाख किमी थी।
दूरी बढऩे के बाद भी क्यों है इतनी गर्मी?
सारिका ने मौसम से जुड़ी एक बड़ी भ्रांति को दूर करते हुए कहा कि आम तौर पर लोग सोचते हैं कि सूर्य से दूरी बढऩे पर ठंड होनी चाहिए, लेकिन भारत सहित उत्तरी गोलार्ध में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। इस विरोधाभास को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि गर्मी या मौसमों का बदलना सूर्य से पृथ्वी की दूरी पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता, बल्कि यह पृथ्वी की धुरी के झुकाव का परिणाम है। दूरी का गर्मी से कोई सीधा नाता नहीं होता है।
पृथ्वी के झुकाव से बदलते हैं मौसम
खगोलीय वैज्ञानिक तथ्यों को साझा करते हुए सारिका ने बताया कि वर्तमान में पृथ्वी अपनी धुरी पर साढ़े 23 डिग्री ($23.5 डिग्री) झुकी हुई है, और इसका उत्तरी गोलार्ध इस समय सूर्य की तरफ झुका हुआ है। इस झुकाव के कारण इन दिनों भारत सहित उत्तरी गोलार्ध के देशों को सूर्य की सीधी और तीखी किरणें मिल रही हैं, जिससे यहां गर्मी का मौसम है। इसके विपरीत, दक्षिणी गोलार्ध (जैसे ऑस्ट्रेलिया) में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ रही हैं, जिससे वहां इस समय सर्दियों का मौसम चल रहा है।
कल दिखेगा साल का सबसे छोटा सूर्य
सारिका घारू के अनुसार, सूर्य से पृथ्वी की दूरी अत्यधिक बढ़ जाने के कारण आकाश में सूर्य का आकार सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 3.4 प्रतिशत छोटा दिखाई देता है। हालांकि, इस सूक्ष्म अंतर को हम अपनी नंगी आंखों से महसूस नहीं कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सचेत करते हुए अपील की है कि इस खगोलीय घटना को उत्साह से जरूर समझें, लेकिन भूलकर भी सूर्य को सीधे नंगी आंखों, साधारण चश्मे या बिना फिल्टर वाली दूरबीन से देखने का प्रयास न करें, क्योंकि यह आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।











