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संपादकीय : अपराधमुक्त शहर के लिए केवल धरपकड़ नहीं, व्यवस्था में ‘कसावट’ और ‘संवाद’ जरूरी

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रोहित नागे, इटारसी 9424482883

पिछले कुछ दिनों में शहर ने आतंक और असुरक्षा का जो दौर देखा, उसने न केवल आम नागरिकों को झकझोर कर रख दिया बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए। बिना किसी ठोस वजह के, महज बदमाशी के शौक और नशे के फितूर में राहगीरों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमले करना—यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ किस कदर खत्म हो चुका था।

सिलसिला थमा जरूर, लेकिन एक की जान जाने के बाद। हालांकि, पिछले दो दिनों से शहर में पसरी शांति राहत देने वाली है, लेकिन वक्त आत्ममुग्ध होने का नहीं, बल्कि गहराई से आत्ममंथन करने का है कि आखिर चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति को कैसे रोका जाए।

संकट के समय ‘समन्वय’ लाया रंग

यह स्वीकार करना होगा कि जब कानून व्यवस्था वेंटिलेटर पर दिख रही थी, तब जनप्रतिनिधि और आला अधिकारियों की सक्रियता ने स्थिति को संभाला। विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा की पुलिस अधिकारियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक और रणनीति का असर धरातल पर दिखा। एसपी साईं कृष्ण एस थोटा ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सिटी पुलिस, आरपीएफ और जीआरपी को एक मंच पर लाकर जो संयुक्त मोर्चा तैयार किया, उसी का परिणाम है कि आज सभी प्रमुख अपराधी सलाखों के पीछे हैं। लगातार गश्त, धरपकड़ और संदिग्धों की तलाशी ने बदमाशों की रीढ़ तोडऩे का काम किया है।

संवादहीनता से नहीं, सहभागिता से चलेगा काम

शहर में पुलिस का नया बल और नए अधिकारी आए हैं। यह सच है कि हर अधिकारी की कार्यशैली अलग होती है, लेकिन नए टीआई सौरभ पांडेय को यह समझना होगा कि पुलिसिंग कोई एकांत में चलने वाली प्रक्रिया नहीं है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी ‘मीडिया’ से दूरी बनाकर कोई भी अधिकारी सफल नहीं हो सकता। मीडिया न केवल जनता की आवाज है, बल्कि पुलिस के लिए एक सशक्त आंख और कान भी है।

इस दिशा में एसडीओपी वीरेन्द्र मिश्रा की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। वे पुराने और अनुभवी अधिकारी हैं। उन्हें पहल करते हुए नए टीआई और स्थानीय पत्रकारों के बीच एक समन्वय बैठक करानी चाहिए, ताकि संवादहीनता की खाई पटे और आपसी तालमेल से अपराधियों पर नजर रखी जा सके।

जमीनी तंत्र को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता

अपराधी जेल जा चुके हैं, इसलिए अतीत की कमियों पर रोने का कोई अर्थ नहीं है, लेकिन भविष्य की सुरक्षा के लिए ‘बीट व्यवस्था’ को दुरुस्त करना अनिवार्य है।

बीट प्रभारियों की जवाबदेही : पूर्व की भांति हर वार्ड और सार्वजनिक स्थलों पर बीट प्रभारियों के नंबर दीवार पर अंकित होने चाहिए, ताकि जनता सीधे उनसे जुड़ सके।

नशे के गढ़ों पर प्रहार : चामुंडा चौराहा और उसके आसपास गांजा, शराब और चरस की सरेआम बिक्री शहर को गर्त में धकेल रही है। यह मानना बचकाना होगा कि पुलिस का मुखबिर तंत्र कमजोर है; कड़वा सच यह है कि महकमे के ही कुछ काली भेड़ों का ‘नजराना’ इन अवैध धंधों को संरक्षण दे रहा है। एसपी को इन आंतरिक विभीषणों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।

‘पांच हजार में बाहर आने’ की गलतफहमी तोडऩा जरूरी

फिल्म का वह संवाद आज के परिप्रेक्ष्य में बिल्कुल सटीक बैठता है—’पुलिस चाहे तो मंदिर के सामने से चप्पल भी चोरी न हो।’ फिर ये अवैध हथियार और चाकू कहां से आ रहे हैं?

बदमाशों में यह दुस्साहस कहां से आया कि वे सरेआम सीसीटीवी कैमरे तोडऩे की धमकी दे रहे हैं? और यह कहना कि ‘पांच हजार में बाहर आ जाएंगे, फिर बताएंगे’—कानून के इकबाल को खुली चुनौती है। पुलिस को इन अपराधियों के दिमाग से यह गलतफहमी तुरंत निकालनी होगी।

शराफत को कमजोरी न समझा जाए

शहर का आम नागरिक जो चुप है, वह कमजोर या कायर नहीं है। वह कानून का सम्मान करने वाला एक शरीफ नागरिक है जो शांति से जीना चाहता है। लेकिन यदि जिम्मेदार तंत्र अपनी भूमिका में ढीला पड़ा, तो आम जनता का सब्र टूटेगा और कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ेगी।

अब समय आ गया है कि अपराधियों के खिलाफ ऐसी नज़ीर पेश करने वाली सख्ती की जाए कि वे अगली बार सड़क पर निकलने से पहले सौ बार सोचें। नागरिकों के मन से असुरक्षा का भय पूरी तरह खत्म करना ही अब प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

Manju Thakur

मंजू ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार एवं Narmadanchal.com के संस्थापक-संपादक हैं। वे वर्ष 2004 से नर्मदांचल क्षेत्र और मध्य प्रदेश की स्थानीय, सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़ी खबरों का संपादन और प्रकाशन कर रही हैं। उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से संस्कृत में स्नातकोत्तर, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक तथा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। पत्रकारिता के साथ-साथ वे डिजिटल मीडिया, समाचार संपादन एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अनुभव रखती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुँचाना है।

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