Editorial: चाहे जो भी हो, अंतत: जीतना हमें ही है

Editorial: चाहे जो भी हो, अंतत: जीतना हमें ही है

कोरोना की तीसरी लहर प्रारंभ हो गयी है। अभी तक यह माना जा रहा था कि कोरोना विदाई की बेला में है और अब जल्द ही इस पर जीत की घोषणा होने वाली है। दुनियाभर से कोरोना की वैक्सीन (Corona Vaccine) के सुखद समाचार भी मिल रहे थे। माना जा रहा था कि इस वर्ष के अंत या 2021 के प्रारंभ तक विश्व को वैक्सीन मिल जाएगी। लेकिन, अब संकेत मिल रहे हैं कि यदि अगले वर्ष के प्रारंभ तक वैक्सीन (Corona Vaccine) मिल भी जाए तो इतनी बड़ी आबादी के लिए उत्पादन और फिर उसके निचले स्तर तक पहुंचने में ही एक वर्ष का वक्त लगेगा। यानी छोटे शहरों तक यह वैक्सीन अगले वर्ष के अंत तक पहुंच पाएगी। जाहिर है, सावधानी में ही सुरक्षा है और यह सावधानी एक वर्ष तक रखनी होगी।
कोरोना (Corona) की थर्ड वेब यूरोपीय देशों में कहर बरपा रही है। अभी तक इसकी कोई दवा नहीं बन पायी है। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कह चुके हैं कि जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं। अमेरिका, रूस, चीन सहित अन्य यूरोपीय देशों में वैक्सीन पर काम चल रहा है। अब भी यह ट्रायल में ही है, इसका नियमित उपयोग कब से होगा, यह पूर्णत: सफल होगी या नहीं, यदि सफल हुई तो एक बार वैक्सीन लेने के बाद व्यक्ति कितना और कब तक सुरक्षित रह सकेगा, यह वैक्सीन के ट्रायल में सफलता मिलने पर निर्भर करेगा। वैक्सीन की उपलब्धता भविष्य में कितनी वास्तविक कहानी लिखेगी, यह बात फिलहाल ठीक-ठीक नहीं कही जा सकेगी, अत: हमें कोरोना (Corona) के प्रारंभिक चरण से जो सिखाया और बताया जा रहा है, उसी पर अमल करने 90 फीसद सुरक्षित हो जाते हैं, और इसे कायम रखना जरूरी है। जैसे हाथों की सफाई का खास ख्याल रखना, इसके प्रति हमें स्वयं जागरुक रहना होगा। क्योंकि यह स्वयं की सुरक्षा के साथ अपने परिवार, समाज, शहर और देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। आप सुरक्षित नहीं होंगे तो आप परिवार को यह रोग देंगे, फिर समाज को और शहर को। एक से एक को और फिर वह एक कितने अन्य को और इस तरह से यह गुणात्मक संख्या में बढ़ता जाता है। यानी आप पर एक महती जिम्मेदारी है, खुद को सुरक्षित रखने की।
फिलवक्त तो सावधानी ही बचाव है। यह वाक्य हम सभी का एक पुराना,जाना पहचाना मूल मंत्र है। इसी ब्रह्मास्त्र को इस्तेमाल करना होगा। भारत में तीसरी वेब आने के पीछे पिछले दिनों बीते त्योहारों के मौसम को माना जा रहा है। इन त्योहारी मौसम में हमने न तो सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का ख्याल रखा, ना ही गाइड लाइन को किसी भी तरह से पालन किया। यह कहें कि हम त्योहारों के उत्साह में अति आत्मविश्वासी हो गये और सुरक्षा के सारे नियमों को तोड़कर बाजारों को भीड़ से भर दिया, बेखौफ खरीदारी की, दूरियों का भी ध्यान नहीं रहा। मुहावरों से कहें तो यह ‘आ बैल मुझे मार’ को चरितार्थ किया है।
अब पुन: उन्हीं बातों और सुझावों की ओर लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। यानी ‘जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नही’, ‘दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी’ विशेषज्ञ बता रहे हैं कि यदि हमने सावधानी नहीं बरती तो तीसरी लहर पहली दो लहरों से अधिक मारक क्षमता वाली, घातक साबित हो सकती है। यानी यदि हमें पहले दो चरणों की तरह कोरोना को परास्त करना है तो फिर से पहले से अधिक धैर्य, विश्वास के साथ इसके साथ संघर्ष करना होगा। इसे वैक्सीन आने के पूर्व अंतिम लड़ाई के तौर पर लेना होगा और सर्वस्व झौंककर जीत के लिए जुट जाना होगा, भारत ने इस तरह की हर लड़ाई जीती है, यह भी जीतेंगे। कोरोना चाहे कोई वायरस हो, जो अचानक पनपा हो, चाहे जैविक हथियार हो। हमें सिर्फ जीत का लक्ष्य लेकर चलना है, इस भरोसे के साथ कि अंतत: जीत हमारी ही होगी।

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